कीमती धातुओं में दिखा बड़ा अंतर
16 फरवरी 2026 को कीमती धातुओं के बाजार में खासी गिरावट देखी गई। CME COMEX पर Gold Futures 0.53% लुढ़क कर $5,019.4 प्रति औंस पर आ गए, जबकि Silver Futures में 1.45% की बड़ी गिरावट के साथ वे $76.835 पर कारोबार कर रहे थे। भारतीय बाजारों में भी यह गिरावट दिखी, जहाँ MCX Gold Futures 0.45% और MCX Silver Futures 1.62% तक नीचे आए। हालांकि, इस सामान्य गिरावट के बीच Exchange Traded Funds (ETFs) में एक बड़ा और अहम अंतर सामने आया। कुछ Gold ETFs ने जहां हल्की बढ़त दर्ज की, वहीं Silver ETFs पर बिकवाली का भारी दबाव रहा, जिससे उनमें खासी गिरावट आई।
Gold ETFs की बढ़त: क्यों दिखायी मजबूती?
यह देखना दिलचस्प था कि Gold Futures पर दबाव के बावजूद, कई Gold ETFs ने 16 फरवरी 2026 को सकारात्मक रिटर्न दिया। उदाहरण के तौर पर, Axis Gold ETF में 0.54% की तेजी देखी गई, वहीं Nippon India ETF Gold BeES और Zerodha Gold ETF ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। यह न सिर्फ Futures Market के रुख के विपरीत था, बल्कि इस आम धारणा से भी अलग था कि सोना और चांदी अक्सर एक साथ चलते हैं। माना जा रहा है कि ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताओं और महंगाई से बचाव (Inflation Hedging) की वजह से निवेशक Gold ETFs को सुरक्षित निवेश (Store of Value) के तौर पर देख रहे हैं। इस दौरान Gold ETFs में इनफ्लो (Inflows) भी देखा गया, जो दर्शाता है कि निवेशक शॉर्ट-टर्म Futures Market के उतार-चढ़ाव से बेफिक्र होकर सोने की सुरक्षा पर दांव लगा रहे हैं।
Silver ETFs पर बिकवाली का दबाव: औद्योगिक मांग का असर
Gold ETFs के विपरीत, Silver ETFs में 16 फरवरी 2026 को एक समान और गहरी गिरावट देखने को मिली। Edelweiss Silver ETF 2.92% और Aditya Birla Sun Life Silver ETF 2.68% तक गिर गए। चांदी की यह तेज गिरावट काफी हद तक इसकी दोहरी प्रकृति के कारण समझाई जा सकती है - यह एक कीमती धातु होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कमोडिटी (Industrial Commodity) भी है। ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन (Economic Slowdown) की चिंताएं, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े कमजोर आंकड़ों से और बढ़ गई थीं, चांदी की औद्योगिक मांग के अनुमान पर सीधा असर डालती हैं। इसके अलावा, 16 फरवरी 2026 को यूएस डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) में आई मजबूती ने भी डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज जैसे चांदी पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
ऐतिहासिक संकेत और मैक्रोइकॉनॉमिक कारक
ऐतिहासिक रूप से, आर्थिक अनिश्चितता के दौर में Gold ETFs निवेशकों को बड़ी गिरावट से बचाने में कामयाब रहे हैं। फरवरी 2025 में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी। 16 फरवरी 2026 का माहौल भी कुछ ऐसा ही संकेत दे रहा था। हालांकि, आर्थिक आंकड़ों के कमजोर होने के बावजूद, बढ़ती ब्याज दरों (Interest Rates) की आशंकाओं ने सोने और चांदी जैसी नॉन-यील्ड एसेट्स (Non-yielding Assets) पर दबाव बनाए रखा। Futures Market भले ही विभिन्न मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतों, मजबूत डॉलर और रेट हाइक की अटकलों पर प्रतिक्रिया दे रहा हो, लेकिन Gold ETF निवेशकों ने धन की सुरक्षा (Wealth Preservation) को प्राथमिकता दी।
चांदी के लिए 'बेयर केस': औद्योगिक निर्भरता और लीवरेज
चांदी की इकोनॉमिक स्लोडाउन के प्रति अधिक संवेदनशीलता इसके लिए एक स्पष्ट 'बेयर केस' (Bear Case) पेश करती है। सोने के विपरीत, जिसकी मांग काफी हद तक औद्योगिक चक्रों से स्वतंत्र होती है, चांदी की कीमत मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट पर बहुत निर्भर करती है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोटिव जैसे क्षेत्रों में। अगर ग्लोबल ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा कमजोर पड़ती है, तो चांदी की मांग में काफी कमी आ सकती है, जिससे सोने की तुलना में इसकी कीमतों में और गिरावट आ सकती है। साथ ही, कई चांदी खदानों (Mining Operations) का लीवरेज (Leverage) अधिक होने और कर्ज का बोझ बढ़ने से, कीमतों में गिरावट के दौरान उनकी मार्जिन पर और दबाव पड़ने की आशंका है।
आगे क्या?
2026 के लिए सोने के प्रति विश्लेषकों का रुख सतर्कता से भरा है, लेकिन वे सेंट्रल बैंकों की खरीद और महंगाई से बचाव की मांग को लेकर आशान्वित हैं। हालांकि, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा ब्याज दरों में किए जाने वाले बदलाव एक महत्वपूर्ण कारक रहेंगे। चांदी का आउटलुक कहीं अधिक मिला-जुला है, जिसकी रफ्तार ग्लोबल औद्योगिक गतिविधियों में सुधार पर निर्भर करेगी। ब्रोकरेज फर्म्स महंगाई के आंकड़ों और भू-राजनीतिक विकास पर बारीकी से नजर रख रही हैं, जो दोनों कीमती धातुओं की मांग को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन 16 फरवरी 2026 को दिखे यह उलटफेर साफ करता है कि आने वाले समय में सोने और चांदी के लिए अलग-अलग फंडामेंटल कारण काम करेंगे।