गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने जून में जोरदार वापसी की है। इन फंड्स में **₹3,443 करोड़** का नेट इनफ्लो (Net Inflow) देखा गया, जो मई के **₹725 करोड़** के आउटफ्लो (Outflow) से काफी अलग है। यह बदलाव दिखाता है कि निवेशक हाल की कीमतों में गिरावट के दौरान सोना खरीद रहे हैं और अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए इसे एक सुरक्षित निवेश के तौर पर देख रहे हैं।
गोल्ड ईटीएफ में निवेशकों का बढ़ा भरोसा
भारतीय निवेशकों ने जून के महीने में गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में फिर से दिलचस्पी दिखाई है। इस दौरान, गोल्ड ईटीएफ कैटेगरी में ₹3,443 करोड़ का भारी नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। यह पिछले महीने, यानी मई की तुलना में एक बड़ा बदलाव है, जब इन फंड्स से ₹725 करोड़ का आउटफ्लो हुआ था।
गोल्ड से जुड़े पैसिव इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में बढ़ी हुई दिलचस्पी एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। जून में, भारत में कुल ईटीएफ कैटेगरी में ₹13,238 करोड़ का निवेश आया, जबकि मई में इसमें ₹620 करोड़ का आउटफ्लो देखा गया था।
निवेशक क्यों खरीद रहे हैं गोल्ड ईटीएफ?
इस नई रुचि के पीछे मुख्य वजह सोने की कीमतों में आई हालिया गिरावट को माना जा रहा है। निवेशक अक्सर कीमती धातु की कीमतों में आई कमी को अपनी होल्डिंग्स बढ़ाने का मौका मानते हैं। कीमतों में आई गिरावट के दौरान खरीदारी के अलावा, कई निवेशक पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए सोने को एक रणनीतिक टूल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के समय में, सोने को पारंपरिक रूप से एक डिफेंसिव एसेट (Defensive Asset) माना जाता है, जो पोर्टफोलियो की अस्थिरता को कम करने में मदद कर सकता है, खासकर तब जब इक्विटी मार्केट में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हों।
पैसिव प्रोडक्ट्स की भूमिका
फाइनेंशियल इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड ईटीएफ और अन्य ईटीएफ में यह फ्लो सिर्फ शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग का नतीजा नहीं है। यह लॉन्ग-टर्म एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) के एक अहम हिस्से के रूप में पैसिव इन्वेस्टिंग की ओर एक सोची-समझी रणनीति को दर्शाता है। गोल्ड ईटीएफ रखने से निवेशकों को फिजिकल गोल्ड खरीदने, स्टोर करने या सुरक्षित रखने जैसी परेशानियों के बिना धातु में एक्सपोजर (Exposure) मिलता है। यह सुविधा, एक्सचेंज-ट्रेडेड कीमतों की पारदर्शिता के साथ मिलकर, उन निवेशकों के लिए इसे एक आकर्षक विकल्प बनाती है जो स्टॉक जैसे जोखिम भरे एसेट्स में अपने एक्सपोजर को संतुलित करना चाहते हैं।
भविष्य के इनफ्लो को प्रभावित करने वाले कारक
हालांकि जून के आंकड़ों में मजबूत Momentum दिख रहा है, लेकिन गोल्ड ईटीएफ इनफ्लो का भविष्य कई बाहरी फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। ग्लोबल इंटरेस्ट रेट के ट्रेंड्स, खासकर अमेरिका में, और करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव सोने की कीमतों और निवेशक के सेंटिमेंट (Sentiment) पर खासा असर डाल सकते हैं। जब इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा होते हैं, तो गोल्ड जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स की तुलना में कम आकर्षक हो सकती हैं। इसके अलावा, भारतीय बाजार में फिजिकल गोल्ड की मांग अभी भी मजबूत है। डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद, फिजिकल गोल्ड की डिमांड ग्राहकों की पसंद में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आने वाले महीनों में गोल्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को इन ग्लोबल इंटरेस्ट रेट मूवमेंट्स और डोमेस्टिक प्राइस ट्रेंड्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि इनफ्लो का यह ट्रेंड जारी रहता है या इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
