Gold ETF में आई बंपर खरीदारी: अमेरिका और चीन से $2.62 अरब का निवेश

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AuthorAditya Rao|Published at:
Gold ETF में आई बंपर खरीदारी: अमेरिका और चीन से $2.62 अरब का निवेश

भौतिक रूप से समर्थित गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में पिछले हफ्ते **$2.62 बिलियन** का शुद्ध निवेश आया है। निवेशकों का रुझान एक बार फिर सोने की ओर बढ़ा है, खास तौर पर अमेरिका और चीन से। भारत भी इस वैश्विक ट्रेंड में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरा है।

Detailed Coverage

सोने की ईटीएफ में लौटी रौनक

पिछले हफ्ते भौतिक रूप से समर्थित गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) में निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ी है। डेटा के अनुसार, इन ईटीएफ में $2.62 बिलियन का शुद्ध निवेश आया है। यह दिखाता है कि पारंपरिक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की ओर निवेशकों का भरोसा लौट रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान कुल $3.36 बिलियन का निवेश हुआ, जबकि $750 मिलियन का पैसा बाहर निकला।

अमेरिका और चीन से सबसे ज़्यादा मांग

इस बार सोने की मांग में सबसे बड़ा योगदान अमेरिका और चीन का रहा। उत्तरी अमेरिका से $1.57 बिलियन का निवेश आया, जबकि एशिया से $622 मिलियन का निवेश दर्ज किया गया। एशिया में, चीन पहले से ही $6.03 बिलियन के साल-दर-तारीख निवेश के साथ एक प्रमुख खिलाड़ी बना हुआ है।

भारत का भी दमदार योगदान

भारत भी वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। साल-दर-तारीख आधार पर भारत से $3.86 बिलियन का निवेश आया है, जो इसे दुनिया भर में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनाता है। हालांकि, यूरोपीय बाजारों का हाल मिला-जुला रहा। पिछले हफ्ते इस क्षेत्र में $463 मिलियन का निवेश आया, लेकिन फ्रांस और इटली जैसे देशों में पैसे की निकासी देखी गई।

सोने की कीमतों का उतार-चढ़ाव

इस साल सोने की कीमतों में काफी उठापटक देखने को मिली है। 29 जनवरी को $5,608 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद, कीमतों में 25% से ज़्यादा की गिरावट आई है। सोमवार, 27 जुलाई, 2026 को सोना लगभग $4,077.37 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। विश्लेषकों का मानना ​​है कि $4,000 प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक सपोर्ट का काम कर रहा है, जो हाल की खरीदारी को बढ़ावा दे सकता है।

आगे क्या?

निवेशकों के फैसले फिलहाल वैश्विक मैक्रोइकॉनॉमिक्स और भू-राजनीतिक जोखिमों से प्रभावित हो रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले कीमतों को प्रभावित करना जारी रखेंगे। निवेशक इन कारकों के प्रति संवेदनशील हैं, क्योंकि बॉन्ड यील्ड और महंगाई की उम्मीदों में बदलाव अक्सर सोने और अन्य वित्तीय संपत्तियों के बीच पूंजी आवंटन को प्रभावित करते हैं। साल-दर-तारीख आधार पर उत्तरी अमेरिका में अभी भी $7.14 बिलियन की शुद्ध निकासी देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि हालिया खरीदारी एक स्थायी लंबी अवधि के रुझान के बजाय एक संभावित रणनीति बदलाव का संकेत हो सकती है। निवेशकों के लिए अगला कदम यह देखना होगा कि केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर के फैसले और क्षेत्रीय संघर्षों का इस निवेश प्रवाह पर क्या असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.