यूनियन बजट 2026 के पेश होने से पहले 31 जनवरी 2026 को ज्वैलरी सेक्टर के बड़े नाम Titan Company Ltd. और Kalyan Jewellers India Ltd. के शेयरों में कुछ गिरावट देखी गई। Titan Company का शेयर 0.99% फिसलकर ₹3,937.95 पर बंद हुआ, वहीं Kalyan Jewellers में 1.7% की नरमी आई और यह ₹355.15 के स्तर पर पहुंच गया। 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कर दिया कि सोने पर मौजूदा कस्टम ड्यूटी ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इस निर्णय से तत्काल सोने के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में वृद्धि की आशंकाएं कम हो गईं, जिससे ज्वैलरी निर्माताओं के लिए मांग और कीमतों पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक असर को टाला जा सका।
हालांकि, भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग की कुछ अन्य बड़ी मांगें अधूरी रह गईं। उद्योग मंडल, जैसे जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, ने चांदी, प्लैटिनम और रंगीन रत्नों जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल पर आयात शुल्क को युक्तिसंगत बनाने की वकालत की थी। उनका तर्क था कि इससे उत्पादन लागत कम होगी, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। इसके अतिरिक्त, उद्योग ने सोने-चांदी के आभूषणों पर जीएसटी (GST) दर को घटाकर 1.25% करने और विदेशी पर्यटकों के लिए टैक्स रिफंड योजना शुरू करने का भी सुझाव दिया था।
यूनियन बजट 2026 में इन व्यापक सुधारों को शामिल न करने के बावजूद, सोने की कस्टम ड्यूटी स्थिर रहने से कंपनियों को तत्काल मार्जिन दबाव से थोड़ी राहत मिली है। विश्लेषकों का मानना है कि कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी न होना परिचालन के लिहाज़ से सकारात्मक है, लेकिन सेक्टर के भविष्य के विकास के लिए और गहरे नीतिगत बदलावों की ज़रूरत पड़ेगी। Titan Company, जो कि एक लार्ज-कैप कंपनी है, लगभग 85-92x के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) अनुपात पर ट्रेड कर रही है। वहीं, मिड-कैप Kalyan Jewellers का P/E लगभग 41-51x है। ये ऊंचे वैल्यूएशन दर्शाते हैं कि निवेशक कंपनी से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं, जिसके लिए स्थिर परिचालन और अनुकूल नीतिगत माहौल ज़रूरी है। भारत में घरों में रखे सोने के विशाल भंडार को गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के ज़रिए इस्तेमाल में लाकर आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है और चालू खाता घाटे को नियंत्रित किया जा सकता है। उद्योग का लक्ष्य भारत को वैश्विक डायमंड ट्रेडिंग हब बनाने का भी है, जिसके लिए नीतिगत समर्थन महत्वपूर्ण होगा। संगठित खुदरा क्षेत्र के लिए आउटलुक अनुकूल बना हुआ है, बशर्ते ऐसी नीतियां बनें जो उपभोक्ता मांग को बढ़ाएं और बढ़ी हुई सोने की कीमतों के बीच लागत के दबाव को कम करें।