बाजार में एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है, जहाँ महंगाई बढ़ने की चिंता, जो आमतौर पर सोने के लिए अच्छी मानी जाती है, अब इसकी कीमतों को नीचे खींच रही है। इसकी मुख्य वजह ऊंची ब्याज दरों का लंबे समय तक बने रहने का अनुमान है, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की ओर से।
इस हफ्ते Gold और Silver की कीमतों में गिरावट आई है। यह तब हो रहा है जब महंगाई बढ़ने की चिंताएं बनी हुई हैं, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल (crude oil) की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जिसकी वजह से सप्लाई की चिंताएं और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कीमतों पर दबाव बना रहे हैं। ऊर्जा की ऊंची लागत सीधे तौर पर व्यावसायिक खर्चों को बढ़ाती है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।
यह विडंबना ही है कि जिस महंगाई से सोने को बचाव (hedge) माना जाता है, वही अब इसे कम आकर्षक बना रही है। विश्लेषकों और बाजार जानकारों का मानना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण केंद्रीय बैंक, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व, ऊंची ब्याज दरों को लंबे समय तक बनाए रखेंगे। उम्मीद की जा रही है कि फेड 2026 तक दरों को स्थिर रखेगा, और बाजार इस साल दरों में सीमित कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। J.P. Morgan Global Research का अनुमान है कि फेड 2026 के बाकी हिस्सों में भी दरों को स्थिर रखेगा, और संभवतः 2027 की तीसरी तिमाही में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी भी कर सकता है। ऊंची ब्याज दरों का यह माहौल सोने जैसी बिना रिटर्न देने वाली संपत्तियों (non-yielding assets) को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) को काफी बढ़ा देता है, जिससे वे उन निवेशों की तुलना में कम आकर्षक हो जाती हैं जिनसे ब्याज मिलता है।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच, बाजार में अस्थिरता पैदा कर रही है और तेल की कीमतों को ऊंचा रखे हुए है। हालांकि ऐतिहासिक रूप से ऐसी तनावपूर्ण स्थितियां सोने की मांग को सुरक्षित आश्रय (safe haven) के रूप में बढ़ाती आई हैं, लेकिन इस बार इसका असर हल्का दिख रहा है। सोने पर लगातार दबाव बना हुआ है, और वर्तमान संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें लगभग 10% की गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, मार्च 2026 में, सोने की कीमत 11.6% गिर गई, जबकि WTI तेल 51.3% बढ़ गया। यह दर्शाता है कि व्यापक आर्थिक कारक भू-राजनीतिक समर्थन पर कैसे हावी हो सकते हैं।
निवेशक अब भविष्य की ब्याज दर की चालों और अर्थव्यवस्था के समग्र स्वास्थ्य के संकेतों के लिए प्रमुख अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, जैसे कि बेरोजगारी के दावों (jobless claims) और पीएमआई (PMI) रिपोर्ट पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। मौजूदा माहौल में सोने की भूमिका को एक प्रमुख मुद्रास्फीति बचाव (inflation hedge) और सुरक्षित आश्रय संपत्ति के रूप में रणनीतिक रूप से फिर से परखा जा रहा है, खासकर तब जब मौद्रिक नीति (monetary policy) प्रमुख कारक हो। निवेशक सोने को रखने की बढ़ती लागत और इसके कथित लाभों के बीच संतुलन बना रहे हैं।
प्रमुख गोल्ड माइनिंग कंपनियों के वैल्यूएशन मिले-जुले हैं। Newmont Mining (NEM) का P/E रेश्यो लगभग 17-18 है, जबकि Barrick Gold (B) का P/E लगभग 13-22 है। तुलना के लिए, बाजार का औसत P/E रेश्यो लगभग 44.25 है, जो बताता है कि गोल्ड माइनर्स अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं। SPDR Gold Shares ETF (GLD), जो गोल्ड निवेश का एक प्रमुख माध्यम है, लगभग $162 बिलियन की संपत्ति का प्रबंधन करता है, जिसका एक्सपेंस रेश्यो 0.40% है। ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स (Bloomberg Commodity Index) द्वारा ट्रैक किए जाने वाले व्यापक कमोडिटी बाजार ने 21 अप्रैल 2026 तक 22% का साल-दर-साल लाभ दिखाया, जो काफी हद तक ऊर्जा की कीमतों के कारण था।
भारतीय बाजार के लिए, विश्लेषकों का अनुमान है कि निकट भविष्य में सोना और चांदी की कीमतें एक तय दायरे में कारोबार करेंगी, जिसमें थोड़ी गिरावट की उम्मीद है। यह पूर्वानुमान वैश्विक रुझानों और व्यापक आर्थिक विकास पर निर्भर करेगा।
सोने की कीमतों के लिए मुख्य जोखिम लंबी अवधि तक ऊंची ब्याज दरों की संभावना बनी हुई है। यदि महंगाई उम्मीद से ज्यादा बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती में देरी कर सकते हैं, जिससे सोने को रखने की लागत और बढ़ जाएगी। जबकि भू-राजनीतिक तनाव तेल की कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति संबंधी चिंताएं बढ़ा रहे हैं, वे वर्तमान में सोने की कीमतों को मजबूत और स्थायी समर्थन प्रदान नहीं कर रहे हैं। ऊंची दरें ब्याज देने वाली संपत्तियों को अधिक आकर्षक बनाती हैं, जो सीधे सोने के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं।
विश्लेषकों को 2026 में सोने की कीमतों में अस्थिरता जारी रहने की उम्मीद है, ज्यादातर अनुमान $4,300 से $4,700 प्रति औंस के बीच हैं, हालांकि कुछ $5,000 तक की भविष्यवाणी कर रहे हैं। चांदी की कीमतों में $65 प्रति औंस से ऊपर जाने की उम्मीद है, जिसमें संभावित लक्ष्य लगभग $88 है। भारत के लिए, वर्तमान वैश्विक आर्थिक और मौद्रिक नीति के माहौल को दर्शाते हुए, सीमित दायरे में कारोबार और मामूली गिरावट की ओर झुकाव का अनुमान है।
