गोल्ड की कीमतों में अपने हालिया पीक से **8%** से ज्यादा की गिरावट आई है और यह **$4,245** प्रति औंस पर आ गया है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की **70%** संभावना को देखते हुए ग्लोबल मार्केट में दबाव बना हुआ है।
ग्लोबल गोल्ड मार्केट में दबाव
सोने की चमक फीकी पड़ती दिख रही है, क्योंकि कीमतें $4,250 के स्तर से नीचे आ गई हैं। 24 सितंबर को यह कीमती धातु $4,245.60 के इंट्राडे लो पर पहुंच गई, जो अगस्त के $4,658 के पीक से करीब 8% नीचे है। यह गिरावट ग्लोबल निवेशकों के बदलते मूड को दर्शाती है।
अमेरिकी पॉलिसी का असर
कीमतों में इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के सख्त रुख की उम्मीद है। बाजार में अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की 70% संभावना जताई जा रही है, जिससे अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड जुलाई 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। जब बॉन्ड से रिटर्न बढ़ता है, तो गोल्ड जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट की डिमांड कम हो जाती है। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स 101 के करीब मजबूत हुआ है, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए सोना महंगा हो गया है।
भारतीय बाजार के लिए संकेत
घरेलू बाजार में इसका असर Multi Commodity Exchange (MCX) पर दिख रहा है, जहां सोने की कीमतें ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर की ओर बढ़ रही हैं। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि Brent crude oil $105.90 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।
तेजी से बढ़ते तेल के दाम भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर दबाव डाल रहे हैं और इससे इंपोर्टेड महंगाई बढ़ सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे विदेशी संस्थागत निवेश (FII flows) और रुपये की चाल पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि आने वाले हफ्तों में इन कारकों से बाजार में वोलेटिलिटी (volatility) बढ़ सकती है।
