सोने के दाम लगातार दूसरे हफ्ते दबाव में हैं। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में आई तेजी ने सोने को होल्ड करने की लागत बढ़ा दी है। हालांकि, वैश्विक तनाव के बावजूद मजबूत डॉलर और फेडरल रिजर्व की सख्त नीति सोने पर भारी पड़ रही है। वहीं, चांदी की सप्लाई में कमी (Supply Deficit) के चलते इसकी चमक बनी हुई है।
क्यों सस्ता हो रहा है सोना?
सोने की कीमतों पर लगातार दूसरे हफ्ते दबाव देखा जा रहा है। निवेशक मुश्किल मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सोना फिलहाल $4,000 प्रति औंस के करीब ट्रेड कर रहा है। यह अप्रैल 2025 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचे 10-वर्षीय अमेरिकी रियल ट्रेजरी यील्ड (US Real Treasury Yields) के प्रभाव से जूझ रहा है। निवेशकों के लिए, सरकारी बॉन्ड पर उच्च यील्ड सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding Assets) को होल्ड करने की अवसर लागत (Opportunity Cost) को बढ़ा देती है, जिससे वे ब्याज-भुगतान वाले निवेशों की तुलना में कम आकर्षक हो जाते हैं।
फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का असर
बाजार की चाल फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के संकेतों के प्रति संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिकी उपभोक्ता महंगाई (US Consumer Inflation) में उम्मीद से थोड़ी नरमी की रिपोर्ट के बावजूद, सोने की कीमतों को मिली राहत अस्थायी साबित हुई। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श (Kevin Warsh) ने प्राइस स्टेबिलिटी (Price Stability) पर अपना कड़ा रुख बनाए रखा है। उनका इशारा है कि केंद्रीय बैंक किसी भी एक डेटा पॉइंट से परे अपनी नीतिगत राह पर कायम रहेगा। इस प्रतिबद्धता ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत बनाए रखने में मदद की है, जो आम तौर पर डॉलर-डिनोमिनेटेड गोल्ड प्राइस (Dollar-denominated Gold Prices) पर उल्टा दबाव डालता है।
इकोनॉमिक डेटा पर नजर
कीमती धातुओं में अगले ट्रेंड की तलाश कर रहे निवेशक आगामी अमेरिकी इकोनॉमिक इंडिकेटर्स (US Economic Indicators) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Producer Price Index) डेटा, रिटेल सेल्स (Retail Sales) की रिपोर्ट और साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स (Weekly Jobless Claims) अर्थव्यवस्था में अंतर्निहित महंगाई के दबाव का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। ऐसे भू-राजनीतिक तनाव अक्सर सेफ-हेवन डिमांड (Safe-haven Demand) को बढ़ावा देते हैं, लेकिन वर्तमान में मजबूत डॉलर और ऊंचे ऊर्जा लागत अल्पकालिक मूल्य आंदोलनों पर हावी हो रहे हैं।
चांदी और सप्लाई डेफिसिट
सोने के विपरीत, जो मुख्य रूप से मॉनेटरी पॉलिसी और करेंसी में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है, चांदी अपने इंडस्ट्रियल सप्लाई डायनामिक्स (Industrial Supply Dynamics) से काफी प्रभावित होती है। फिलहाल $58.50 प्रति औंस के करीब ट्रेड कर रही चांदी को मजबूत डॉलर और उच्च बॉन्ड यील्ड के कारण समान अल्पकालिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, सप्लाई में लगातार छठे साल घाटे (Supply Deficits) के अनुमान से मध्यम से लंबी अवधि के दृष्टिकोण को समर्थन मिल रहा है। चूंकि चांदी अक्सर बेस मेटल माइनिंग (Base Metal Mining) के एक उप-उत्पाद के रूप में निकाली जाती है, इसलिए सप्लाई को बढ़ती कीमतों के जवाब में आसानी से नहीं बढ़ाया जा सकता है। इस स्ट्रक्चरल टाइटनेस (Structural Tightness) से आने वाले महीनों में कीमतों को सहारा मिलने की उम्मीद है, भले ही वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण अल्पकालिक अस्थिरता बनी रहे।
