डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक शांति से सोने पर दबाव
मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को सोने के फ्यूचर्स (Futures) में बड़ी गिरावट आई। MCX पर अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के दाम 2,228 रुपये या 1.44% गिरकर ₹1,52,532 प्रति 10 ग्राम पर आ गए। यह गिरावट ग्लोबल मार्केट में भी देखी गई, जहां Comex पर अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के फ्यूचर्स $119.6 या 2.37% लुढ़ककर $4,926.7 प्रति औंस पर पहुंच गए। इस गिरावट की मुख्य वजह भू-राजनीतिक तनाव में कमी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ परमाणु चर्चाओं में अप्रत्यक्ष अमेरिकी भूमिका के सुझावों और यूक्रेन-रूस के बीच ताजा बातचीत ने राजनयिक प्रगति की उम्मीदें जगाईं, जिससे सोने की 'सेफ-हेवन' (Safe-haven) संपत्ति के तौर पर मांग कम हो गई। वहीं, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.19% बढ़कर 97 के पार चला गया, जिससे डॉलर-denominated कमोडिटीज जैसे सोने को विदेशी खरीदारों के लिए महंगा बना दिया। इन सब वजहों से हालिया अस्थिरता के बाद मुनाफावसूली (Profit-taking) भी देखने को मिली, जिससे स्पॉट गोल्ड 2.33% गिरकर $4,877.87 प्रति औंस पर आ गया।
कंसॉलिडेशन का दौर, पर लंबी अवधि का आउटलुक अभी भी बुलिश
हालांकि, मौजूदा गिरावट के बावजूद, मार्केट एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि यह सोने में चल रहे बहु-वर्षीय तेजी के ट्रेंड (Bullish Trend) के बीच एक कंसॉलिडेशन (Consolidation) का दौर है। Lemonn Markets Desk के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग का कहना है कि सोना फिलहाल ₹1.55 लाख से ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम की रेंज में कंसॉलिडेट कर रहा है। उन्होंने इस कमजोरी को ट्रेंड में बड़े बदलाव के बजाय एक करेक्शन (Corrective Phase) बताया है। गर्ग निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे मौजूदा डिप्स (Dips) पर पोजीशन होल्ड करें और धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं, क्योंकि बाजार में फिलहाल कुछ उठापटक बनी हुई है।
ऐतिहासिक रूप से, सोने की कीमतों ने मजबूती दिखाई है, जहां स्पॉट गोल्ड पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 67.68% ऊपर है। एनालिस्ट्स का लॉन्ग-टर्म (Long-term) आउटलुक (Outlook) अभी भी बुलिश (Bullish) है। उदाहरण के लिए, J.P. Morgan Global Research का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही तक सोने की कीमतें $5,000/oz तक पहुंच सकती हैं, और उनका मानना है कि केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग और निवेशकों के डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) के कारण यह लंबी अवधि में $6,000/oz तक भी जा सकता है। Goldman Sachs ने 2026 के लिए $5,400 प्रति औंस का बेस केस (Base Case) बताया है, जबकि UBS का टारगेट $6,200 है और Morgan Stanley के बुल केस (Bull Case) में यह $5,700 तक जा सकता है।
तात्कालिक चुनौतियां और फेडरल रिजर्व पर नजर
लेकिन, तात्कालिक तौर पर कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। डॉलर की मजबूती एक बड़ा कारक है, जिसने पिछले महीने DXY को सिर्फ 2.31% नीचे आने दिया है, जबकि पिछले 12 महीनों में यह 9.30% गिरा है। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की जनवरी की मीटिंग के मिनट्स (Minutes) का इंतजार है, जो ब्याज दरों (Interest Rates) को लेकर आगे की दिशा तय करेंगे। CME FedWatch Tool के अनुसार, बाजार फिलहाल जून में रेट कट की उम्मीद कर रहा है, लेकिन किसी भी अनिश्चितता से बाजार में उतार-चढ़ाव आ सकता है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या फेडरल रिजर्व महंगाई पर अधिक सख्त रुख अपनाएगा, जो सोने के लिए कम सपोर्टिव हो सकता है।
भू-राजनीतिक जोखिमों का जारी रहना और ईटीएफ प्रदर्शन
हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाओं में कोई अप्रत्याशित वृद्धि होने पर 'सेफ-हेवन' की मांग फिर से बढ़ सकती है। लेकिन, ईरान परमाणु वार्ता और यूक्रेन-रूस संघर्ष जैसे मुद्दों पर लगातार राजनयिक प्रगति सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है। अन्य कीमती धातुओं जैसे प्लैटिनम के विपरीत, जिसकी कीमतें औद्योगिक मांग से बढ़ी हैं, सोने की मौजूदा तेजी काफी हद तक मैक्रो पॉलिसी (Macro Policy) और भू-राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर करती है। गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) का प्रदर्शन भी इस सावधानी को दर्शाता है, जिनमें से कुछ मंगलवार को 4% तक गिर गए, जो अल्पावधि (Short-term) में निवेशकों के विश्वास में कमी का संकेत देता है।
