गणेश चतुर्थी के दौरान सोने की डिमांड में **15%** की कमी आई है। भाव **₹1.57 लाख** प्रति **10 ग्राम** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से खरीदार अब हल्के गहनों और पुराने सोने के एक्सचेंज को तरजीह दे रहे हैं।
डिमांड पर महंगाई की मार
गणेश चतुर्थी के मौके पर भारतीय बाजारों में सोने की खुदरा मांग में सुस्ती देखी गई। पिछले साल के मुकाबले वॉल्यूम सेल्स में लगभग 15% की गिरावट दर्ज की गई है। इस सुस्ती की मुख्य वजह कीमतों में आया भारी उछाल है। मुंबई स्पॉट मार्केट में सोना ₹1.57 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी दौरान ₹98,000 था। यानी कीमतों में 60% की बड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते आम ग्राहक अब गैर-जरूरी खरीदारी टाल रहे हैं।
ज्वैलरी रिटेलर्स के सामने चुनौती
सोने के बढ़ते दाम ज्वैलरी कंपनियों के लिए दोधारी तलवार साबित हो रहे हैं। भले ही ऊंचे भाव से उनका रेवेन्यू बढ़ता दिखे, लेकिन असल चुनौती 'वॉल्यूम ग्रोथ' की है। जब दाम तेजी से बढ़ते हैं, तो ग्राहक कम वजन वाले गहनों की ओर शिफ्ट हो जाते हैं, जिससे रिटेलर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ता है। इन्वेंट्री मैनेजमेंट और वर्किंग कैपिटल को सही बनाए रखने के लिए रिटेलर्स को अब अपनी प्रोक्योरमेंट स्ट्रैटेजी में बदलाव करना होगा।
ग्राहकों का बदलता बर्ताव
बाजार में अब 'वैल्यू' को प्राथमिकता दी जा रही है। लोग नए गहने खरीदने के लिए अपना पुराना सोना एक्सचेंज करने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। वहीं, सोने के सिक्के और बार्स (bullion) की मांग अभी भी बनी हुई है क्योंकि निवेशक इसे एक सुरक्षित एसेट के तौर पर देख रहे हैं।
वेडिंग सीजन से उम्मीदें
अब सबकी नजरें आने वाले वेडिंग सीजन पर टिकी हैं। ज्वेलरी सेक्टर को उम्मीद है कि शादी-ब्याह की मांग से बाजार में फिर रौनक लौटेगी। रिटेलर्स अब ऐसे डिजाइन पर फोकस कर रहे हैं जो हर रोज पहने जा सकें और गिफ्टिंग के लिहाज से भी बेहतर हों। निवेशकों के लिए अब कंपनियों के आने वाले फाइनेंशियल रिजल्ट्स में वॉल्यूम ट्रेंड्स और मार्जिन स्टेबिलिटी पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
