सोने की कीमतें चढ़ीं, खरीददारी घटी, पर वैल्यू बढ़ी!
इस अक्षय तृतीया पर सोने के दाम आसमान छूते दिखे, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 60% तक उछल गए। 10 ग्राम सोने का भाव ₹1,55,780 के पार जा पहुंचा। इस बेतहाशा बढ़ोतरी का सीधा असर खरीदारी पर पड़ा, और बेचे गए सोने की मात्रा (वॉल्यूम) में करीब 30% की भारी गिरावट आई।
'कम सोना, ज्यादा मोल' वाला फंडा चला!
हालांकि, खरीदारों ने समझदारी दिखाते हुए अपनी खरीददारी की रणनीति बदली। ऊंची कीमतों के दौर में, लोगों ने हल्के गहने, छोटे सोने के सिक्के और जड़ेऊ आइटम्स को तरजीह दी। बिक्री का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 40-50%, पुराने सोने के एक्सचेंज (ट्रेड-इन) के जरिए हुआ, जिसका मतलब है कि लोगों ने अपना मौजूदा सोना देकर नए गहने खरीदे। इस बदलती हुई मांग पैटर्न के चलते, कुल सौदे का मूल्य 20-25% तक बढ़ गया।
भू-राजनीतिक तनाव की जगह मैक्रो फैक्टर्स ने ली
दिलचस्प बात यह है कि मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सोने की 'सेफ हेवन' (सुरक्षित निवेश) मांग पर कोई खास असर नहीं दिखा। ग्लोबल गोल्ड की कीमतें मार्च में ही लगभग 13% गिर चुकी थीं। इसका मुख्य कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर, बढ़ती ट्रेजरी यील्ड्स और पिछ् dịp रैलियों के बाद प्रॉफिट-टेकिंग थी। ऊंची रियल यील्ड्स के चलते सोने को होल्ड करना कम आकर्षक हो गया था।
मार्केट का आउटलुक और वैल्यूएशन
भारतीय ज्वेलरी मार्केट का आकार लगातार बढ़ रहा है, और 2032 तक इसके 91.95 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस सेक्टर की प्रमुख कंपनियों जैसे कल्याण जूलर्स (Kalyan Jewellers) का P/E रेश्यो लगभग 39-40 है, जबकि टाइटन कंपनी (Titan Company) का P/E 83 के आसपास है। पीएनजी जूलर्स (PNG Jewellers) का P/E 21-23 है, जो इंडस्ट्री के औसत से ऊपर है। ये वैल्यूएशन बताते हैं कि निवेशक इन कंपनियों से भविष्य में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि सोने की मांग मूल्य (वैल्यू) के मामले में मजबूत बनी रहेगी, भले ही खरीदे गए सोने की मात्रा (वॉल्यूम) कम रहे। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का भी अनुमान है कि भारत की कुल सोने की मांग 2026 तक पिछले पांच वर्षों के निचले स्तर पर जा सकती है। फिलहाल, सोने के ऊंचे दाम खरीदारों के लिए एक बड़ा जोखिम बने हुए हैं। अगर कीमतें इसी तरह बनी रहीं, तो वॉल्यूम में और कमी आ सकती है, और उच्च वैल्यूएशन वाली कंपनियों के लिए भी चुनौती बढ़ सकती है।
