Gold Investment: 40 साल में सोने ने दिया **11.4%** का रिटर्न, क्या आगे भी जारी रहेगी ये चमक?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold Investment: 40 साल में सोने ने दिया **11.4%** का रिटर्न, क्या आगे भी जारी रहेगी ये चमक?

पिछले 40 वर्षों का डेटा बताता है कि Gold ने औसतन **11.4%** सालाना रिटर्न दिया है। हालांकि, यह बढ़त एक सीधी रेखा में नहीं, बल्कि चक्रों (cycles) में आई है। **2019 से 2026** के बीच की **21%** की तेज रैली को देखकर भविष्य के फैसले लेना निवेशकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

भारत में सोने को केवल निवेश नहीं, बल्कि सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। पिछले चार दशकों का विश्लेषण करें तो सोने ने 11.4% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिया है। लेकिन, इस सफर को अगर करीब से देखें तो यह हमेशा ऊपर की ओर नहीं गया है। सोने की कीमतें लंबे समय तक स्थिर रहने के बाद अचानक बड़ी तेजी दिखाती हैं।

सोने की कीमतों का 'साइक्लिक' खेल

निवेशक अक्सर यह गलती करते हैं कि वे हर साल सोने से एक जैसी बढ़त की उम्मीद पाल लेते हैं। डेटा गवाह है कि 2012 से 2019 तक बाजार लगभग फ्लैट था, लेकिन इसके बाद 2019 से सितंबर 2026 तक सोने में 21% की जबरदस्त वार्षिक उछाल देखने को मिली। जो निवेशक सुस्त दौर में बाजार से बाहर निकल गए, उन्होंने बाद की बड़ी तेजी का फायदा गंवा दिया। सोने के निवेश में सफलता का मंत्र 'लंबा नजरिया' ही है।

फिजिकल गोल्ड बनाम फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स

अक्सर धनतेरस या शादियों के सीजन में लोग फिजिकल ज्वेलरी खरीदते हैं। लेकिन मेकिंग चार्ज, वेस्टेज और टैक्स जैसे छुपे हुए खर्च (friction costs) आपके नेट रिटर्न को काफी कम कर देते हैं। स्पॉट प्राइस में जो चमक दिखती है, फिजिकल गोल्ड में वह मुनाफा घर तक पहुंचते-पहुंचते काफी कम हो जाता है।

इसके मुकाबले Gold ETFs या Sovereign Gold Bonds ज्यादा पारदर्शी विकल्प हैं। इनमें मेकिंग चार्ज या स्टोरेज का कोई झंझट नहीं होता और आप सीधे मार्केट प्राइस का फायदा उठा सकते हैं।

हालिया रिटर्न को बेंचमार्क न मानें

हाल के सालों में मिली 21% की शानदार सालाना ग्रोथ को भविष्य का आधार मानना एक बड़ी गलती हो सकती है। सोने के रिटर्न कभी भी एक समान (linear) नहीं होते। इसे पोर्टफोलियो में एक 'हेज' (hedge) की तरह रखें जो मार्केट की अस्थिरता के समय काम आए, न कि इसे हर साल मुनाफा देने वाली स्कीम समझें। समझदारी इसी में है कि अपने पोर्टफोलियो को रिस्क मैनेजमेंट के आधार पर व्यवस्थित करें, न कि सिर्फ हालिया तेजी के पीछे भागें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.