अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक बढ़ाने के फैसले के बाद सोने की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। 20 अगस्त 2026 को सोना $4,500 प्रति औंस के पार निकल गया, जो जून के बाद पहली बार है। गिरे हुए अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स और कमजोर डॉलर ने इस तेजी को और हवा दी है।
सोने की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
20 अगस्त 2026 को सोने की कीमतों ने एक महत्वपूर्ण स्तर को पार करते हुए $4,500 प्रति औंस का आंकड़ा छू लिया। यह जून के बाद पहली बार हुआ है जब कीमती धातु इस स्तर पर पहुंची है। इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में आई तेज गिरावट है, जिसने सोने को निवेशकों के लिए एक आकर्षक 'स्टोर ऑफ वैल्यू' (Store of Value) बना दिया है।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा ऐलान
बाजार में लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी ने एक बड़ा कदम उठाया है। 9 सितंबर 2026 से, ट्रेजरी 10-वर्षीय से 30-वर्षीय बॉन्ड के बायबैक (Buyback) ऑपरेशन को दोगुना करके $2 बिलियन से कम से कम $4 बिलियन प्रति ऑपरेशन कर देगा। यह कार्यक्रम 4 नवंबर तक चलेगा और इसका मकसद हाल के बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंचे उधार लागत को नियंत्रित करना है। लंबी अवधि के बॉन्ड खरीदकर, ट्रेजरी यील्ड्स को कम करने की कोशिश कर रहा है, जो हाल ही में 5.34% के शिखर स्तर से गिरकर लगभग 5.19% पर आ गए हैं। जैसे-जैसे बॉन्ड यील्ड्स गिरती हैं, सोने जैसी संपत्ति को रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) कम हो जाती है, जिससे इसकी कीमत को समर्थन मिलता है।
फेडरल रिजर्व की चिंताएं और सोना
हालांकि बॉन्ड बायबैक ने सोने को सहारा दिया है, लेकिन व्यापक आर्थिक परिदृश्य जटिल बना हुआ है। फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की जुलाई की मीटिंग के मिनट्स (Minutes) से पता चला है कि नीति निर्माताओं को अभी भी लगातार महंगाई (Inflation) की चिंता है। कई अधिकारियों का मानना है कि यदि महंगाई कम नहीं होती है तो भविष्य में ब्याज दरों में और वृद्धि की आवश्यकता हो सकती है। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर सोने की कीमतों पर दबाव डालती हैं, जिससे सोने की दिशा में एक खींचतान बनी हुई है।
अन्य आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक
मौद्रिक नीति के अलावा, संरचनात्मक आर्थिक दबाव भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिकी सार्वजनिक ऋण $40 ट्रिलियन के पार चला गया है, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध जैसी भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण ऊर्जा की कीमतें और महंगाई की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं। कई निवेशकों के लिए, सोना इन अनिश्चितताओं के खिलाफ एक बचाव (Hedge) के रूप में काम करता है।
भारतीय बाजार पर असर
वैश्विक बुलियन (Bullion) में आई इस रिकवरी का सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा है। भारत में कीमतों की प्रवृत्ति को दर्शाने वाले MCX गोल्ड फ्यूचर्स (MCX Gold Futures) में भी पहले की गिरावट से उबरते हुए तेजी देखी गई। भारतीय निवेशकों के लिए, सोने की कीमतें न केवल वैश्विक डॉलर के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती हैं, बल्कि रुपये की मजबूती और स्थानीय मांग-आपूर्ति की गतिशीलता से भी प्रभावित होती हैं।
आगे क्या?
बाजार की नजरें अब आने वाले अमेरिकी आर्थिक संकेतकों पर टिकी हैं, जिनमें साप्ताहिक बेरोजगारी दावों और विनिर्माण डेटा शामिल हैं। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या ट्रेजरी का लिक्विडिटी हस्तक्षेप उधार लागत को स्थायी रूप से कम कर सकता है, या क्या लगातार महंगाई फेडरल रिजर्व को उच्च ब्याज दरें बनाए रखने के लिए मजबूर करेगी, जिससे सोने में और अधिक तेजी की संभावना सीमित हो सकती है।
