आर्थिक आंकड़ों से मिली सोने को उड़ान, पर Fed की राह सख्त
अमेरिकी रिटेल सेल्स (Retail Sales) के आंकड़े उम्मीद से कमजोर आने के बाद सोने और चांदी के भाव में चमक लौट आई है। दिसंबर के लिए यह आंकड़ा फ्लैट रहा, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कंज्यूमर स्पेंडिंग (Consumer Spending) धीमी पड़ सकती है। ऐसे में, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ओर से इस साल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें बढ़ी हैं। इन उम्मीदों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yield) को नीचे ला दिया है, जो सोने-चांदी जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-Yielding Assets) के लिए सकारात्मक है। मार्केट अभी यह मानकर चल रहा है कि फेड साल 2026 में कम से कम दो बार 25-25 बेसिस पॉइंट्स (Basis Points) की दरें घटा सकता है, जिसकी शुरुआत जून के आसपास हो सकती है। फिलहाल, स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) लगभग $5,040 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, वहीं स्पॉट सिल्वर (Spot Silver) में भी अच्छी रिकवरी देखने को मिली है।
भारत में रिकॉर्ड इनफ्लो, निवेशक गोल्ड ETF की ओर आकर्षित
दूसरी ओर, भारत में निवेशकों ने जनवरी में सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख किया है। भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन (Portfolio Diversification) की चाहत के चलते गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में रिकॉर्ड इनफ्लो (Inflow) देखा गया। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में आया निवेश ₹24,040 करोड़ रहा, जो इक्विटी फंड्स (Equity Funds) के करीब पहुंच गया, जो कि पहली बार हुआ है। इसका मतलब है कि निवेशक मौजूदा बाजार में थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं। चांदी ईटीएफ (Silver ETF) में भी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (Assets Under Management) में अच्छा इजाफा हुआ है। साल 2026 में अब तक गोल्ड सबसे बेहतर परफॉर्म करने वाली एसेट क्लास साबित हुई है, जिसने लगभग 16% का रिटर्न दिया है।
फेड की ओर से 'धैर्य' का संकेत, महंगाई पर चिंता!
हालांकि, बाजार की इन उम्मीदों के बीच फेडरल रिजर्व के अधिकारी सतर्क रुख अपना रहे हैं। क्लीवलैंड फेड की प्रेसिडेंट बेथ हैमक (Beth Hammack) ने साफ कर दिया है कि ब्याज दरों में कटौती को लेकर 'कोई जल्दबाजी नहीं' है। उनका मानना है कि महंगाई (Inflation) अभी भी Fed के 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर, यानी करीब 3% के आसपास बनी हुई है। ऐसे में, दरों में कटौती से पहले महंगाई को पूरी तरह काबू में लाना जरूरी है। बाजार की यह उम्मीद कि फेड आक्रामक तरीके से दरें घटाएगा, शायद फेड के डबल मैंडेट (Dual Mandate) को नजरअंदाज कर रही है, जिसमें प्राइस स्टेबिलिटी (Price Stability) और मैक्सिमम एम्प्लॉयमेंट (Maximum Employment) दोनों का ध्यान रखना होता है। आने वाले नॉन-फार्म पेरोल (Non-Farm Payrolls) और महंगाई के आंकड़े फेड की आगे की पॉलिसी तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इस बीच, 10-साल के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US 10-Year Treasury Yield) लगभग 4.15%-4.22% के आसपास बने हुए हैं। साल 2026 में अब तक गोल्ड में 15% की तेजी आई है, जबकि सिल्वर में 10% का उछाल देखा गया है।
आगे क्या? डेटा पर टिकी रहेगी नजर
आगे चलकर, सोने और चांदी की चाल आने वाले इकोनॉमिक डेटा (Economic Data) और फेड की कमेंट्री पर निर्भर करेगी। एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि सेंट्रल बैंक की खरीद (Central Bank Demand) और रेट कट की उम्मीदों के चलते सोने का बुलिश ट्रेंड (Bullish Trend) जारी रह सकता है, और यह साल 2026 के अंत तक $5,000 प्रति औंस के स्तर को भी छू सकता है। हालांकि, अगर आने वाले दिनों में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा गर्म आते हैं या लेबर मार्केट मजबूत रहता है, तो रेट कट की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है। इसके विपरीत, अगर अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत मिलते हैं, तो यह दरों में कटौती की संभावनाओं को बढ़ाएगा और सोने को सपोर्ट देगा। बाजार की उम्मीदों और फेड के रुख में यह अंतर फिलहाल उतार-चढ़ाव (Volatility) बनाए रख सकता है।