सोने में क्यों आई तेजी?
मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच, सोने की कीमतों में रिकवरी देखी जा रही है। राजनयिक प्रयासों से तत्काल भू-राजनीतिक चिंताएं शांत हुई हैं, जिसके कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतों में भी नरमी आई। इसी के साथ, यूएस डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) और यूएस ट्रेजरी यील्ड्स (US Treasury yields) में भी कुछ गिरावट देखी गई, जो आमतौर पर सोने के लिए सकारात्मक माहौल बनाती है।
'रिस्क-ऑन' का खेल या सुरक्षित निवेश?
लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि यह तेजी सोने की पारंपरिक 'सुरक्षित पनाहगाह' वाली भूमिका से हटकर है। 9 अप्रैल को स्पॉट गोल्ड में करीब 1.5% की बढ़त देखी गई, जो लगातार तीसरा दिन था। यह व्यवहार 'रिस्क-ऑन' सेंटिमेंट और शॉर्ट कवरिंग की ओर इशारा कर रहा है, यानी निवेशक इस वक्त थोड़ी जोखिम वाली संपत्तियों (risk assets) में पैसा लगा रहे हैं।
महंगाई और फेड की मुश्किलें
यह सब तब हो रहा है जब महंगाई (inflation) एक बड़ी चिंता बनी हुई है। फरवरी का पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पिछले साल के मुकाबले 2.8% बढ़ा, जबकि कोर PCE 3.0% रहा। यह फेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर है। ऐसे में, यह आशंका बनी हुई है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जो सोने जैसी प्रॉपर्टी के लिए अक्सर दबाव का कारण बनती है।
सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और लंबी अवधि का भरोसा
दूसरी ओर, पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (People's Bank of China) जैसी सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रही हैं। मार्च में भी उन्होंने 5 टन सोना खरीदा, जो लगातार 17वां महीना था। यह रिजर्व डाइवर्सिफिकेशन की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) और जेपी मॉर्गन (JPMorgan) जैसे बड़े ब्रोकरेज हाउस का भी मानना है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमतें $5,400 से बढ़कर $6,300 प्रति औंस तक जा सकती हैं, जो सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए है।
रैली की टिकाऊपन पर सवाल
हालांकि, इस रैली की टिकाऊपन (sustainability) पर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौता नाजुक बताया जा रहा है। अगर फिर से तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतें ऊँची जाती हैं, तो यह महंगाई को और बढ़ाएगा। इससे फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती में देरी करनी पड़ सकती है, जिससे डॉलर मजबूत होगा और ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ेंगी, जो सोने के लिए महत्वपूर्ण बाधाएं खड़ी कर सकती हैं।
आगे क्या?
4 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में अमेरिका में बेरोजगारी दावों (jobless claims) की संख्या बढ़कर 219,000 हो गई, जो इकोनॉमी में नरमी का संकेत देती है। लेकिन महंगाई के आंकड़े फेड को अभी बड़ी कटौती से रोक सकते हैं। मार्केट की नजरें अब मार्च के यूएस सीपीआई (US CPI) डेटा पर होंगी, जो महंगाई की असली तस्वीर दिखाएगा और फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियों को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे ही सोने की अल्पकालिक और मध्यम अवधि की दिशा तय होगी।