खौफ की वजह से सोने की डिमांड बढ़ी
13 फरवरी 2026 को ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल था, जिसने सोने की कीमतों को पंख लगा दिए। अमेरिकी इक्विटी मार्केट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण होने वाले संभावित व्यवधानों को लेकर घबराहट और पैनिक सेलिंग (panic selling) देखने को मिली। इसी बीच, लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितताओं ने, सोने को एक बार फिर "सेफ-हेवन एसेट" (safe-haven asset) के तौर पर स्थापित कर दिया। इसके अलावा, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक लगातार बड़ी मात्रा में सोने की खरीदारी कर रहे हैं, जो इसकी स्ट्रक्चरल डिमांड (structural demand) को मजबूत करता है। करेंसी डीबेसमेंट (currency debasement) की चिंताओं ने भी सोने को सपोर्ट दिया है।
भारत में 24K सोने का भाव ₹154,570 प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गया, जो एक दिन में 1.49% की बढ़त दर्शाता है। खास बात यह है कि भारतीय बाजार में सोना अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क, जैसे दुबई, की तुलना में अभी भी प्रीमियम पर बिक रहा है। इस दिन भारत में 24K सोना दुबई की तुलना में करीब 4.90% महंगा था (ड्यूटी और टैक्स को छोड़कर)।
बड़े संकेत और विरोधाभास
हालांकि, सोने में आई यह तेजी कुछ मजबूत सिरदर्दों के साथ आई है। अमेरिका के लेबर मार्केट से आए आंकड़े उम्मीद से कहीं ज़्यादा मज़बूत रहे। जनवरी में नॉन-फार्म पेरोल्स (Nonfarm Payrolls) में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई और बेरोजगारी दर घटकर 4.3% पर आ गई। इन आंकड़ों के बाद, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं। अब बाजार जुलाई में रेट कट की उम्मीद कर रहा है, जो पहले जून में तय मानी जा रही थी। ऐसी "हायर-फॉर-लॉन्गर" (higher-for-longer) इंटरेस्ट रेट की संभावना, सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (non-yielding assets) को कम आकर्षक बनाती है, क्योंकि इन्हें रखने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ जाती है। साथ ही, इसने यूएस डॉलर को भी मज़बूती दी है।
सोने के साथ चलने वाली चांदी (Silver) ने भी काफी वोलेटिलिटी (volatility) दिखाई। एक बड़ी तेजी के बाद, चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट आई और इसके फ्यूचर्स (futures) एक समय पर लगभग 10% तक गिर गए, जो व्यापक मार्केट में डीलेवरेजिंग (deleveraging) के ट्रेंड को दर्शाता है। भारत में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) ने ऐतिहासिक रूप से शानदार प्रदर्शन किया है, जहां 2024-2025 में 1-साल के रिटर्न लगभग 75% रहे और टॉप फंड्स के लिए 5-साल के रिटर्न 200% से भी ज़्यादा रहे।
एनालिस्ट्स (Analysts) की राय फिलहाल पॉजिटिव बनी हुई है। 2026 के लिए मीडियन फोरकास्ट (median forecasts) $4,746.50 से $6,300 प्रति ट्रॉय औंस (troy ounce) के बीच है। जिगर त्रिवेदी (Jigar Trivedi) ऑफ इंडसइंड सिक्योरिटीज (Indusind Securities) का अनुमान है कि एमसीएक्स गोल्ड अप्रैल फ्यूचर्स (MCX Gold April futures) ₹154,000/ 10g तक वापस आ सकते हैं।
⚠️ मंदी वाले विश्लेषकों का तर्क
हालांकि, विश्लेषकों का भरोसा बढ़ रहा है, लेकिन सोने की यह तेजी स्ट्रक्चरली (structurally) कमज़ोर दिखती है। अमेरिकी लेबर मार्केट की लगातार मज़बूती और फेडरल रिजर्व का इन्फ्लेशन (inflation) पर ध्यान केंद्रित करना, यह संकेत देता है कि ब्याज दरों में कटौती में देरी हो सकती है या वे उम्मीद से कम हो सकती है। इस स्थिति में, यूएस डॉलर के मज़बूत होने की संभावना है, जो सोने के लिए बड़े डाउनसाइड रिस्क (downside risk) पैदा करता है। AI डिसरप्शन की कहानी गहरे, ज़्यादा समय तक चलने वाली इक्विटी मार्केट में गिरावट का रूप ले सकती है, जिससे सभी एसेट क्लास, जिसमें प्रेशियस मेटल्स (precious metals) भी शामिल हैं, में डीलेवरेजिंग का दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा, लगातार सेंट्रल बैंक की खरीदारी पर निर्भरता, जो अभी सपोर्ट का काम कर रही है, वह भी कम हो सकती है अगर ग्लोबल इकोनॉमिक कंडीशन (economic conditions) में अचानक बदलाव आता है या भू-राजनीतिक तनाव कम होते हैं। भारतीय सोने की कीमतों का दुबई के मुकाबले प्रीमियम भी जांच का विषय है, जो स्थानीय मांग की गतिशीलता को दर्शा सकता है, लेकिन इसमें इंपोर्ट ड्यूटी और करेंसी इफ़ेक्ट भी शामिल हैं जो पॉलिसी बदलावों के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं। अगर इन्फ्लेशन के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक नरम नहीं होते हैं, या फेड से कोई हॉकिश (hawkish) सरप्राइज आता है, तो मौजूदा सेंटीमेंट (sentiment) तेज़ी से पलट सकता है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का अनुमान है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतें रेंज-बाउंड (range-bound) रह सकती हैं, क्योंकि बाजार अभी भी विपरीत आर्थिक संकेतों का आकलन कर रहा है। इक्विटी और कमोडिटी मार्केट में देखी जा रही वोलेटिलिटी बने रहने की उम्मीद है, जिससे ऐसा माहौल बनेगा जहाँ सोने की दिशा अमेरिकी इन्फ्लेशन डेटा और फेडरल रिजर्व की पॉलिसी संकेतों से तय होगी। हालांकि सोने का व्यापक आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है, जिसमें सेंट्रल बैंकों की स्ट्रक्चरल डिमांड और लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं शामिल हैं, अल्पावधि में कीमतों में उतार-चढ़ाव की उम्मीद है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी बड़ा निवेश निर्णय लेने से पहले अंतरराष्ट्रीय रुझानों और घरेलू आर्थिक संकेतों पर करीब से नज़र रखें।