30 जनवरी का भूचाल: क्यों गिरी सोने की कीमत?
30 जनवरी 2026 को सोने की कीमतों ने पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा एकदिनी गोता लगाया। रिकॉर्ड स्तरों से करीब 10-12% तक गिरकर सोना $5,600 के पार से लुढ़ककर लगभग $4,895 प्रति औंस के स्तर पर आ गया। इस बड़ी गिरावट और $7 ट्रिलियन के कुल मार्केट वैल्यू के नुकसान का असर सोने और चांदी दोनों पर दिखा। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें अचानक मुनाफावसूली, बाज़ार में कम लिक्विडिटी और सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले चेयरपर्सन के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम का ऐलान था। वॉर्श के संभावित सख्त रुख (hawkish stance) की आशंका ने निवेशकों को घबरा दिया और लीवरेज्ड पोज़िशन्स (leveraged positions) की बिकवाली शुरू हो गई।
सोने की ज़बरदस्त वापसी और बुल मार्केट जारी
हालांकि, इस भारी गिरावट के बावजूद, सोने का बुल मार्केट (bull market) अभी भी मज़बूत बना हुआ है। 5 फरवरी 2026 तक, सोना लगभग $5,035 प्रति औंस के स्तर पर वापस आ गया है, जो इसकी ज़बरदस्त रिकवरी क्षमता को दर्शाता है। UBS, जिसने इस गिरावट से पहले ही $6,200 प्रति औंस का लक्ष्य 2026 के मध्य तक के लिए दिया था, अपने इस लक्ष्य पर कायम है। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम (geopolitical risks), केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें घटाने की उम्मीदें और निवेशकों की मज़बूत मांग जैसे कारक सोने की कीमतों को बढ़ाते रहेंगे।
चांदी की हालत: सोने से ज़्यादा अस्थिर
दूसरी ओर, चांदी (Silver) में सोने से भी कहीं ज़्यादा बड़ी गिरावट देखी गई। 30 जनवरी 2026 को चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई $121 प्रति औंस से लगभग 30-35% तक लुढ़क गईं और $85 प्रति औंस के आसपास आ गईं। पिछले साल भर में चांदी लगभग 278% उछली थी, लेकिन इतनी तेज़ बढ़त के बाद यह ओवरबॉट (overbought) हो गई थी और अचानक बिकवाली का शिकार बन गई। UBS ने चांदी में अभी ज़्यादा निवेश से बचने की सलाह दी है, जब तक कि कीमतों में और गिरावट न आ जाए, क्योंकि इसमें ज़्यादा अस्थिरता (volatility) देखी जा रही है। 5 फरवरी 2026 तक चांदी $89.88 प्रति औंस के करीब कारोबार कर रही है।
विश्लेषकों का भरोसा: $6200 का लक्ष्य क्यों?
बावजूद इसके कि हाल ही में बड़ी उथल-पुथल मची, कई बड़े वित्तीय संस्थानों को सोने के बुल मार्केट पर भरोसा है। UBS के $6,200 प्रति औंस के लक्ष्य के अलावा, JP Morgan ने 2026 के अंत तक $6,300 प्रति औंस और Deutsche Bank ने $6,000 प्रति औंस का लक्ष्य रखा है। इन सबका मानना है कि सोने की कीमतों में मज़बूत फंडामेंटल (fundamental) बने हुए हैं। इसमें लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद में वृद्धि और अमेरिकी डॉलर की चाल जैसे कारक शामिल हैं। UBS का कहना है कि सोने में $4,500–$4,800 प्रति औंस की रेंज में और गिरावट संभव है, जो निवेशकों के लिए आखिरी मौका हो सकता है, इससे पहले कि कीमतें $6,200 के पार निकलने की राह पर आगे बढ़ें।
