अमेरिका से आए मजबूत जॉब डेटा के बाद गोल्ड के दाम **2.4%** टूट गए हैं, वहीं Bitcoin **$80,000** के स्तर से नीचे फिसल गया है। बाजार में अब फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना **60%** तक पहुंच गई है।
मार्केट में हलचल की वजह
अमेरिका में अगस्त के लेबर मार्केट आंकड़े उम्मीद से काफी बेहतर रहे हैं। देश में 1,62,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं, जो यह बताती हैं कि वहां की इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है। इस मजबूती ने फेडरल रिजर्व पर दबाव डाल दिया है कि वे महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कड़ा फैसला ले सकते हैं।
बाजार पर असर
6 सितंबर को गोल्ड स्पॉट की कीमतों में 2.4% की गिरावट आई, जबकि Bitcoin, जो अगस्त में $80,000 के स्तर के ऊपर कारोबार कर रहा था, अब इस मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया है। CME FedWatch टूल के मुताबिक, 16 सितंबर की पॉलिसी मीटिंग में रेट हाइक की संभावना 58% से 60% के बीच आंकी जा रही है।
क्यों दबाव में हैं ये एसेट क्लास?
गोल्ड और Bitcoin जैसे एसेट, जो कोई निश्चित आय (Yield) नहीं देते, ब्याज दरें बढ़ने पर अक्सर निवेशकों की पहली पसंद नहीं रह जाते। जैसे ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर मजबूत होता है, निवेशक सुरक्षित सरकारी बॉन्ड्स की ओर शिफ्ट होने लगते हैं, जिससे नॉन-यील्डिंग एसेट्स में बिकवाली का दबाव बढ़ता है।
लंबी अवधि का आउटलुक
भले ही शॉर्ट टर्म में गिरावट दिख रही हो, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जो इसके भाव को एक सपोर्ट देता है। इसके अलावा, अमेरिका का $40 ट्रिलियन का कर्ज चिंता का विषय है। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार कर्ज चुकाने के लिए नोट छापने का रास्ता चुनती है, तो गोल्ड और Bitcoin भविष्य में एक 'स्टोर ऑफ वैल्यू' की तरह काम कर सकते हैं।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर 16 सितंबर की फेड मीटिंग पर होगी। तब तक, महंगाई के आंकड़ों और लेबर मार्केट के डेटा में आने वाली हलचल के चलते कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। साथ ही, U.S. Dollar Index और ट्रेजरी यील्ड के मूवमेंट्स पर बारीक नजर रखना जरूरी है क्योंकि यही शॉर्ट टर्म में सोने और क्रिप्टो की दिशा तय करेंगे।
