पिछले एक दशक में Gold ने शानदार प्रदर्शन करते हुए **365%** का रिटर्न दिया है, जो महंगाई दर से कहीं अधिक है। हालांकि, 2026 की शुरुआत में बने उच्चतम स्तर से कीमतें अब **22%** तक टूट चुकी हैं।
पिछले 10 वर्षों में भारतीय पोर्टफोलियो के लिए Gold एक बेहतरीन एसेट साबित हुआ है। इसका कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 16.58% रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के डेटा के मुताबिक, सोने की कीमतें 2016 में ₹29,989 प्रति 10 ग्राम थीं, जो नवंबर 2026 तक ₹1,39,000 के पार पहुंच गईं। इस दौरान महंगाई दर (Cost Inflation Index) में औसतन 3.82% की ही बढ़ोतरी हुई है, जिसने सोने को एक सुरक्षित निवेश का जरिया बनाया है।
2026 में क्यों आई गिरावट?
जनवरी 2026 में गोल्ड ने ₹1,76,306 प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, लेकिन उसके बाद से इसमें 22% की गिरावट देखी गई है। इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक बदलाव हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण सोने की चमक फीकी पड़ी है, क्योंकि गोल्ड पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। साथ ही, फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर बदलती उम्मीदों के चलते निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग की है। रुपये में कमजोरी के बावजूद सोने की कीमतों को सहारा नहीं मिल पा रहा है।
निवेशकों के लिए सलाह
हालिया उतार-चढ़ाव यह सिखाते हैं कि बाजार के टॉप पर खरीदारी जोखिम भरी हो सकती है। विशेषज्ञ अब फिजिकल ज्वैलरी के बजाय गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (Sovereign Gold Bonds) को बेहतर विकल्प मान रहे हैं, क्योंकि इनमें स्टोरेज का खर्च और मेकिंग चार्ज का झंझट नहीं होता। आने वाले समय में ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स और भारतीय रुपये की स्थिरता सोने की चाल तय करेगी।
