ब्लैक सी (Black Sea) शिपिंग रूट को लेकर जारी कूटनीतिक बातचीत के विफल होने से Wheat Futures में करीब **3%** की तेजी आई है। इस संकट के कारण ग्लोबल बायर्स अब ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे भारतीय FMCG और बेकरी सेक्टर पर इनपुट कॉस्ट का दबाव बढ़ सकता है।
ग्लोबल मार्केट का हाल
मंगलवार को शिकागो Wheat Futures में करीब 3% की तेजी देखी गई और कीमतें $7.56 प्रति बुशेल के स्तर तक पहुंच गईं। यह उछाल तब आया जब अमेरिका के दूतों की रूस और यूक्रेन के साथ सुरक्षित शिपिंग एग्रीमेंट को लेकर बातचीत बेनतीजा रही। सैन्य हमलों के कारण ब्लैक सी रूट फिलहाल पूरी तरह ब्लॉक और असुरक्षित बना हुआ है, जो अनाज एक्सपोर्ट के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है।
बदलता सप्लाई चैन और लॉजिस्टिक्स
युद्ध के कारण दुनिया भर में अनाज खरीद का तरीका बदल रहा है। ब्लैक सी क्षेत्र के प्रमुख एक्सपोर्ट टर्मिनल डैमेज होने के कारण ग्लोबल बायर्स अब अपना ध्यान ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे देशों पर केंद्रित कर रहे हैं। सप्लाई चैन के इस बदलाव से लॉजिस्टिक्स पर बोझ बढ़ा है, क्योंकि बाजार में अनिश्चितता का माहौल है।
भारतीय मार्केट के लिए क्या हैं संकेत?
भारत भले ही गेहूं का बड़ा उत्पादक है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में कीमतों का असर यहां भी पड़ता है। विशेष रूप से बिस्कुट, ब्रेड और नूडल्स बनाने वाली कंपनियां, जो गेहूं को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करती हैं, उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। यदि इनपुट कॉस्ट लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो कंपनियों को अपनी मुनाफा दर बनाए रखने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
आगे क्या देखें निवेशक?
मार्केट की नजर अब शुक्रवार को आने वाली U.S. Department of Agriculture की मंथली सप्लाई-एंड-डिमांड रिपोर्ट पर है। यह रिपोर्ट ग्लोबल स्टॉक लेवल और कीमतों के भविष्य के ट्रेंड को लेकर साफ तस्वीर पेश करेगी। डोमेस्टिक फ्रंट पर, निवेशकों को सरकार की एक्सपोर्ट पॉलिसी और लोकल महंगाई के आंकड़ों पर बारीक नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही फैक्टर्स तय करेंगे कि ग्लोबल एग्रीकल्चरल ट्रेंड्स का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा असर पड़ेगा।
