क्यों हॉर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण है?
यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार की जीवन रेखा मानी जाती है। हर दिन यहां से लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और दुनिया का करीब 20% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) गुजरता है। यह दुनिया की कुल पेट्रोलियम तरल पदार्थों की खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है, और वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 30% इसी रास्ते से होकर गुजरता है, जिसमें बड़ा हिस्सा एशियाई देशों के लिए होता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संकरे बिंदु पर केवल 21 नॉटिकल मील चौड़ा है, जहां शिपिंग लेन (shipping lanes) दोनों दिशाओं में सिर्फ 2 मील की हैं। यह इसे व्यवधान के प्रति बेहद संवेदनशील बनाता है।
विकल्प नाकाफी, रास्ता मुश्किल
तेल के लिए कुछ वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं, लेकिन उनकी कुल क्षमता हॉर्मुज से गुजरने वाले सामान्य ट्रैफिक को संभालने के लिए नाकाफी है। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (East-West Pipeline) हर दिन 7 मिलियन बैरल तक तेल ले जा सकती है, और UAE की हबशान-फुजैराह पाइपलाइन (Habshan-Fujairah pipeline) 1.5 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) की क्षमता रखती है, जिसे 1.8 मिलियन बैरल तक बढ़ाया जा सकता है। इन दोनों को मिलाकर अधिकतम लगभग 8.5 मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता बनती है, जो हॉर्मुज से गुजरने वाले 20 मिलियन बैरल की तुलना में बहुत कम है। सबसे बड़ी बात यह है कि कतर से होने वाले भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) निर्यात के लिए कोई व्यवहार्य बाइपास पाइपलाइन (bypass pipeline) नहीं है, जिसका मतलब है कि सभी कार्गो को हॉर्मुज से ही गुजरना पड़ता है।
भारत पर सीधा असर
ऊर्जा आयात पर भारी निर्भर भारत इस स्थिति से सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है। भारत के लगभग 50% कच्चे तेल का आयात, करीब 55-60% एलएनजी (LNG) और एक महत्वपूर्ण 80-85% लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की जरूरतें हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आती हैं। कच्चे तेल के विपरीत, जिसके लिए भारत के पास रणनीतिक भंडार (strategic reserves) हैं और कुछ हद तक विविधीकरण (diversification) के विकल्प भी हैं, वहीं एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) के लिए भारत के पास बड़े पैमाने पर रणनीतिक भंडार नहीं हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल से ऊपर जाती हैं, तो भारत के चालू खाता घाटे (current account deficit) में 30-40 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। हर $1 की बढ़ोतरी सालाना आयात बिल में लगभग $2 बिलियन का इजाफा कर सकती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है। एलपीजी (LPG) की सप्लाई में रुकावट एक विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि यह देश में खाना पकाने के लिए एक मुख्य ईंधन है और इसके लिए संरचनात्मक बफर (structural buffers) बहुत कम हैं।
भविष्य का अनुमान
जानकार मानते हैं कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है, तो ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें $100 प्रति बैरल या उससे ऊपर जा सकती हैं। कुछ अनुमानों के अनुसार, यह $120-$150 या अत्यधिक गंभीर परिदृश्यों में $300 तक भी पहुंच सकता है। इस तरह के मूल्य स्तर वैश्विक महंगाई और आर्थिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन (supply chain) की मजबूती पर एक बड़ी चुनौती पेश करती है, खासकर जब एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) जैसे महत्वपूर्ण कमोडिटीज़ (commodities) के लिए आसानी से उपलब्ध वैकल्पिक बुनियादी ढांचा (alternative infrastructure) मौजूद नहीं है।