साल 2026 में ग्लोबल स्टील कीमतें करीब **$620** प्रति टन के आसपास सीमित रहने का अनुमान है। हालांकि, भारत **7.4%** की डिमांड ग्रोथ के साथ दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता स्टील मार्केट बना हुआ है, लेकिन ग्लोबल सरप्लस क्षमता भारतीय कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
ग्लोबल मार्केट की सुस्त चाल
आने वाले समय में स्टील कीमतों में बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। साल 2025 में कीमतें औसतन $585 प्रति टन थीं, जो 2026 में बढ़कर $620 प्रति टन के आसपास रहने का अनुमान है। मार्केट पर प्रोडक्शन की ऊंची लागत, जैसे कि एनर्जी और कोकिंग कोल की महंगाई का दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, चीन से मांग में कमी के कारण ग्लोबल मार्केट में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिल रहा है।
भारत: एक 'ब्राइट स्पॉट'
भारतीय निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू मार्केट वैश्विक चुनौतियों से अलग अपनी रफ्तार बनाए हुए है। 2026 में भारत की स्टील डिमांड 7.4% बढ़ने का अनुमान है, जो इसे दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता मार्केट बनाता है। इस घरेलू मांग का सीधा फायदा Tata Steel, JSW Steel, Jindal Steel & Power और SAIL जैसी दिग्गज कंपनियों के रेवेन्यू को मिल रहा है।
मार्जिन पर दबाव का जोखिम
हालांकि सब कुछ आसान नहीं है। OECD ने चेतावनी दी है कि 2028 तक ग्लोबल अतिरिक्त क्षमता (Excess Capacity) 745 मिलियन टन तक पहुंच सकती है। जब ग्लोबल स्तर पर कीमतें स्थिर रहती हैं और क्षमता अधिक होती है, तो स्टील कंपनियों के लिए कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो जाता है। अगर इनपुट कॉस्ट तेजी से बढ़ती है, तो भारतीय कंपनियों के मुनाफे यानी मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
इसके अलावा, पश्चिमी देशों की व्यापारिक नीतियां (Protectionist policies) भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले समय में निवेशकों के लिए कंपनियों की कर्ज प्रबंधन क्षमता, कैपेसिटी यूटिलाइजेशन और ग्लोबल प्राइस सीलिंग के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
