रूस द्वारा यूक्रेन के स्टील और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने से ग्लोबल सप्लाई चेन पर संकट के बादल छा गए हैं। प्रमुख प्लांट और पावर ग्रिड पर हमलों के बाद कमोडिटी मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है, जिसका असर स्टील की कीमतों और एनर्जी कॉस्ट पर पड़ सकता है।
रूस की हालिया सैन्य कार्रवाई ने यूक्रेन के औद्योगिक और एनर्जी सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। क्रिवी रिह (Kryvyi Rih) और जपोरिजिया (Zaporizhzhia) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में पावर ग्रिड और स्टील उत्पादन सुविधाओं को निशाना बनाए जाने के बाद ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में हलचल बढ़ गई है।
ArcelorMittal के प्लांट पर असर
क्रिवी रिह में स्थित स्टील प्लांट, जिसका संबंध लक्जमबर्ग की दिग्गज कंपनी ArcelorMittal से है, पर भी हमले की खबर है। हालांकि, यह प्लांट पहले से ही संघर्ष के कारण बंद पड़ा था, लेकिन लगातार हो रहे हमलों ने ग्लोबल स्टील मार्केट में भविष्य को लेकर डर पैदा कर दिया है। क्रेमलिन ने स्पष्ट किया है कि ये हमले उनकी औद्योगिक साइट्स को निशाना बनाने की रणनीति का हिस्सा हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
भारतीय निवेशकों को इस युद्ध के ग्लोबल कमोडिटी कीमतों पर पड़ने वाले असर को बारीकी से समझना होगा। स्टील मैन्युफैक्चरिंग में एनर्जी एक बड़ा इनपुट कॉस्ट है। झिटोमिर (Zhytomyr) में बिजली सबस्टेशन पर हमले और फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर स्टील कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है। सर्दियों के दौरान एनर्जी की मांग बढ़ती है, ऐसे में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर की बर्बादी कीमतों पर और दबाव बना सकती है।
इसके अलावा, ब्लैक सी (Black Sea) में समुद्री जहाजों को लेकर बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए चिंता का विषय है। कमोडिटी सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा सीधे तौर पर स्टील सेक्टर के मुनाफे (Profit margins) और प्रतिस्पर्धा पर असर डालती है। निवेशकों को आने वाले दिनों में स्टील इंडेक्स, कोयले और एनर्जी प्राइसेज के साथ-साथ कंपनियों के कमेंट्री पर कड़ी नजर रखनी होगी।
