दुनियाभर में कच्चे स्टील का उत्पादन जून में पिछले साल के मुकाबले 1.7% बढ़ा है, लेकिन यह वृद्धि कम बेस इफेक्ट के कारण ज्यादा है। वहीं, घटती आयरन ओर की कीमतें और चीन-भारत में धीमी होती GDP ग्रोथ इंडस्ट्री के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।
क्या है पूरी कहानी?
जून 2026 में ग्लोबल क्रूड स्टील प्रोडक्शन में पिछले साल की तुलना में मामूली 1.7% की बढ़ोतरी देखी गई। यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है जब इंडस्ट्री लंबे समय से गिरावट झेल रही थी, लेकिन यह संकेत अभी भी कमजोर लग रहे हैं। इस ग्रोथ का बड़ा हिस्सा पिछले साल के कम उत्पादन आंकड़ों (low base effect) के कारण है, न कि अचानक औद्योगिक खपत में आई तेजी के कारण।
चीन और भारत की डिमांड पर असर
ग्लोबल स्टील इंडस्ट्री के लिए चीन सबसे महत्वपूर्ण है, जो कुल उत्पादन और खपत का लगभग आधा हिस्सा रखता है। चीन का प्रॉपर्टी सेक्टर, जो स्टील की भारी मांग पैदा करता है, अभी भी मंदी का सामना कर रहा है। इसी वजह से, जून में चीन का स्टील उत्पादन मई की तुलना में 0.8% गिर गया।
भारत में भी ग्रोथ की रफ्तार धीमी होती दिख रही है। जून में भारत का स्टील प्रोडक्शन 4.5% बढ़ा, जो कि साल की पहली छमाही में दर्ज 7.1% की ग्रोथ से काफी कम है। IMF ने भी अनुमान लगाया है कि भारत की GDP ग्रोथ 2026 में घटकर 6.4% रह सकती है, जो 2025 में 7.7% थी।
आयरन ओर की कीमतें और प्रॉफिट पर खतरा
प्रोडक्शन वॉल्यूम के अलावा, इंडस्ट्री की सेहत जानने के लिए कमोडिटी की कीमतों पर भी नजर रखी जा रही है। स्टील बनाने के लिए जरूरी मुख्य कच्चा माल, आयरन ओर की कीमत मई में $110 प्रति टन से घटकर जून में $98 प्रति टन हो गई है। यह गिरावट मैन्युफैक्चरर्स की ओर से कमजोर डिमांड का संकेत हो सकती है।
निवेशकों के लिए, GDP ग्रोथ में नरमी और कच्चे माल की गिरती कीमतों का मेल स्टील कंपनियों के लिए एक मिली-जुली स्थिति बना रहा है। जहाँ एक ओर इनपुट कॉस्ट कम होने से मार्जिन में थोड़ी राहत मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर कम डिमांड के माहौल में स्टील की कीमतों में गिरावट से यह फायदा खत्म हो सकता है। अगर स्टील की कीमतें इनपुट कॉस्ट से तेजी से गिरती हैं, तो प्रोड्यूसर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर भारी दबाव आ सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आगे चलकर, इस सेक्टर के लिए सबसे अहम होगा आयरन ओर की कीमतों का ट्रेंड और चीन के प्रॉपर्टी मार्केट में रिकवरी के संकेत। निवेशक प्रमुख घरेलू और वैश्विक स्टील उत्पादकों से उनके ऑर्डर बुक और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर मैनेजमेंट की कमेंट्री पर भी नजर रख सकते हैं। यह देखना जरूरी होगा कि जून की प्रोडक्शन ग्रोथ एक सच्ची रिकवरी की शुरुआत है या फिर मुश्किल आर्थिक माहौल में एक अस्थायी ठहराव।
