Crude Oil Update: सप्लाई बढ़ने के बावजूद क्यों नहीं गिर रहे दाम? $100 के पार अटकी कीमतें

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Crude Oil Update: सप्लाई बढ़ने के बावजूद क्यों नहीं गिर रहे दाम? $100 के पार अटकी कीमतें

वेस्ट एशिया से कच्चे तेल का एक्सपोर्ट बढ़कर **18.5 मिलियन बैरल प्रति दिन** पहुंच गया है, लेकिन क्रूड के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। कीमतें अभी भी **$100 प्रति बैरल** के आसपास बनी हुई हैं।

सप्लाई में सुधार, फिर भी क्यों 'लाल' नहीं हो रहे दाम?

ग्लोबल ऑयल मार्केट में इस समय एक अजीब स्थिति बनी हुई है। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में, Brent Crude $100 से $102 प्रति बैरल के बीच ट्रेड कर रहा है। हालांकि वेस्ट एशिया से सप्लाई बढ़कर 18.5 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गई है, लेकिन इसके बावजूद कीमतों में कोई बड़ी राहत नहीं है। भारत जैसे बड़े इम्पोर्टर्स के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि इससे घरेलू महंगाई पर दबाव बना हुआ है।

कैसे बदले सप्लाई रूट?

सालों से तेल के लिए दुनिया 'Strait of Hormuz' पर निर्भर थी, लेकिन अब यह निर्भरता कम हो रही है। Saudi Arabia अपने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है, तो वहीं UAE अब फुजैराह (Fujairah) पाइपलाइन के जरिए तेल भेज रहा है। इस लॉजिस्टिकल बदलाव से सप्लाई चेन के फिजिकल अवरोध तो कम हुए हैं, लेकिन मार्केट में इसका असर कीमतों में नहीं दिख रहा है।

इन्वेंट्री और रिजर्व का खेल

कीमतें ऊंची रहने का सबसे बड़ा कारण ग्लोबल स्टोरेज की कमी है। पिछले 5 सालों में इन्वेंट्री अपने सबसे निचले स्तर पर है। G7 देशों द्वारा इमरजेंसी स्टॉक से 100 मिलियन बैरल तेल निकालने के बावजूद मार्केट में नरमी नहीं आई है। दरअसल, जैसे ही बाजार में तेल आ रहा है, अलग-अलग देश अपने स्ट्रैटेजिक रिजर्व को भरने में जुट जा रहे हैं। Saudi Aramco ने भी मार्केट शेयर बचाने के लिए नवंबर के लिए अपने प्राइजिंग में बदलाव किए हैं, जो डिमांड को और मजबूत कर रहे हैं।

भू-राजनीतिक रिस्क और निवेशकों के लिए नसीहत

US और Iran के बीच तनाव ने ऑयल की हर बूंद में एक 'रिस्क प्रीमियम' जोड़ दिया है। रेड सी और हार्मोनुज स्ट्रेट में सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि ग्लोबल सप्लाई बफर बेहद कम है। अगर कोई भी छोटा व्यवधान आता है, तो कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकती है। भारत के निवेशकों को अब ग्लोबल इन्वेंट्री डेटा और मिडिल ईस्ट की राजनीतिक हलचल पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.