मिडल ईस्ट में जारी तनाव के कारण क्रूड ऑयल की शिपिंग लागत पिछले साल के **$3** प्रति बैरल से बढ़कर **$20** प्रति बैरल पर पहुंच गई है। बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च का सीधा असर भारतीय रिफाइनरियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
संकट की बड़ी वजह
शिपिंग लागत में यह भारी उछाल मिडल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण है। 'होरमुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के आसपास के इलाकों में सुरक्षा जोखिम बढ़ने की वजह से जहाजों को अब लंबे और जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। इसके अलावा, $7 का वॉर-रिस्क प्रीमियम और फ्यूल की बढ़ती कीमतों ने डिलीवरी खर्च को और बढ़ा दिया है।
रिफाइनरियों पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। शिपिंग लागत बढ़ने से क्रूड की 'लैंडेड कॉस्ट' (Landed Cost) सीधे बढ़ जाती है। इसका सीधा असर रिफाइनरियों के GRM (Gross Refining Margin) पर पड़ता है, जो कच्चा तेल खरीदने और पेट्रोल-डीजल बेचने की कीमत का अंतर होता है।
इन शेयरों पर रखें नजर
इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी कंपनियां और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे निजी रिफाइनर अब दुविधा में हैं। इन कंपनियों को यह तय करना होगा कि बढ़े हुए खर्च का बोझ वे खुद उठाएं या पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों पर डालें। विश्लेषकों का मानना है कि $90 प्रति बैरल के आसपास ब्रेंट क्रूड रहने के बावजूद, लॉजिस्टिक्स का यह दबाव बना रहेगा। फिलहाल, ये कंपनियां अपने सप्लाई चेन को रि-एडजस्ट करने और भौगोलिक रूप से पास के सप्लायर्स को तलाशने पर मजबूर हो सकती हैं ताकि जोखिम कम किया जा सके।
