2 नवंबर, 2026 को ग्लोबल ऑयल मार्केट में नरमी देखी गई और Brent Crude का भाव **$111** प्रति बैरल के आसपास रहा। सप्लाई चेन में सुधार के बावजूद, **$27** प्रति बैरल का जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम और बढ़ा हुआ फ्रेट कॉस्ट कीमतों को गिरने नहीं दे रहा है।
सोमवार, 2 नवंबर 2026 को क्रूड ऑयल की कीमतों में मामूली सुस्ती दिखी, जिसके पीछे ईरान और कतर के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत रही। इस दौरान Brent Crude 1.4% गिरकर $111.84 और WTI Crude 1.5% फिसलकर $102.56 प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। लेकिन क्या ये राहत लंबी है? मार्केट के हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं।\n\n### रिस्क प्रीमियम और बदलती मार्केट लॉजिक\n\nपुराने समय में सप्लाई रूट सुधरते ही कीमतें गिर जाती थीं, लेकिन आज स्थिति अलग है। Goldman Sachs के विश्लेषकों का अनुमान है कि अभी भी हर बैरल पर $27 का जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम जुड़ा हुआ है। गल्फ देशों में नई टैंकर क्षमता आने के बावजूद, अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों और सप्लाई में अचानक रुकावट का डर कीमतों को गिरने से रोक रहा है।\n\n### फ्रेट कॉस्ट का बढ़ा बोझ\n\nतेल के ट्रांसपोर्टेशन में एक बड़ा बदलाव आया है। अब फ्रेट और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कुल लागत का 30% हिस्सा बन गई है, जो पहले 5% से भी कम थी। यानी अगर सप्लाई सुधर भी जाए, तो भी पुरानी औसत कीमतों पर लौटना मुश्किल है क्योंकि बेस कॉस्ट बहुत ऊपर जा चुकी है।\n\n### घटे हुए स्टॉक से बढ़ी बेचैनी\n\nग्लोबल मार्केट से करीब 1 अरब बैरल स्टॉक खत्म हो चुका है, जिससे सप्लाई शॉक को झेलने वाली बफर क्षमता खत्म हो गई है। बाजार में 'बैकवर्डेशन' (Backwardation) की स्थिति बनी हुई है, जिससे स्टॉक और कम हो रहे हैं और मार्केट किसी भी अनहोनी के प्रति बेहद संवेदनशील हो गया है। निवेशकों के लिए आने वाला समय अभी भी काफी उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है।
