साल 2026 की दूसरी तिमाही में सोने की ग्लोबल डिमांड **1,269 टन** पर स्थिर बनी हुई है। हालांकि, ऊंची कीमतों के चलते ज्वैलरी और गोल्ड ETFs की मांग में गिरावट आई, लेकिन केंद्रीय बैंकों की खरीदारी में **62%** की जबरदस्त बढ़ोतरी ने बाजार को संभाले रखा।
केंद्रीय बैंकों का बढ़ता दखल
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने अपने ऑफिशियल रिजर्व में 289 टन सोने का इजाफा किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 62% ज्यादा है। पोलैंड, चीन और चेक गणराज्य जैसे देशों ने बड़े पैमाने पर खरीदारी की, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी 200 किलो सोना अपने पोर्टफोलियो में जोड़ा।
ज्वैलरी और निवेश पर असर
दूसरी तरफ, ऊंची कीमतों का असर कंज्यूमर सेगमेंट पर साफ दिखा। ग्लोबल ज्वैलरी की मांग वॉल्यूम के हिसाब से 17% घट गई, क्योंकि खरीदारों ने हल्के वजन वाले उत्पादों की ओर रुख किया। हालांकि, वैल्यू के मामले में यह सेक्टर मजबूत रहा, जिसकी मांग साल की पहली छमाही में $86 बिलियन तक पहुंची।
गोल्ड-बैक्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) से निवेशकों ने 262 टन का पैसा निकाला, क्योंकि उन्होंने मेटल की कीमतों में हुए उतार-चढ़ाव के बाद अपनी पोजीशन एडजस्ट की। वहीं, फिजिकल गोल्ड बार और सिक्कों की मांग में 3% की मामूली गिरावट आई।
सप्लाई और फ्यूचर आउटलुक
कुल मिलाकर सोने की सप्लाई 1,269 टन पर स्थिर रही। माइनिंग प्रोडक्शन में 2% की बढ़ोतरी हुई, जो 966 टन तक पहुंच गया। दिलचस्प बात यह है कि ऊंचे दामों के बावजूद, रीसाइकिल किए गए सोने की मात्रा पिछले साल की तुलना में 6% कम हुई, जिससे पता चलता है कि लोग अपने मौजूदा सोने को बेचने के बजाय होल्ड कर रहे हैं।
आने वाली तिमाहियों में, सोने का प्रदर्शन मॉनेटरी पॉलिसी और निवेशक सेंटीमेंट पर निर्भर करेगा। उम्मीद है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जारी रहेगी, लेकिन इसकी रफ्तार पहले जैसी तेज नहीं रह सकती। रिटेल निवेशकों और ज्वैलरी इंडस्ट्री के लिए ऊंची कीमतों की चुनौती बनी रह सकती है।
