जनवरी 2026 के हाई लेवल्स से आई गिरावट के बाद अब बड़े एसेट मैनेजर्स जैसे Amundi SA और Fidelity International ने सोने (Gold) में अपना निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है। फेडरल रिजर्व की सख्ती के बावजूद इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स जियो-पॉलिटिकल और फिस्कल रिस्क से बचने के लिए इसे एक सुरक्षित दांव मान रहे हैं।
बाजार की नई चाल
इन्वेस्टमेंट जगत में सोने की चमक फिर से लौटती दिख रही है। जनवरी 2026 में सोने के दाम $5,600 प्रति औंस के करीब पहुंचे थे, जिसके बाद आई करेक्शन के बीच अब बड़े ग्लोबल फंड हाउस फिर से सोने की खरीदारी कर रहे हैं। Fidelity International के एक फंड ने तो अगस्त 2026 के केवल 3 सप्ताह के भीतर अपनी होल्डिंग्स में बड़ा इजाफा किया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर सपोर्ट लेवल बना रहा, तो साल के अंत तक भाव वापस $5,000 प्रति औंस के स्तर को छू सकते हैं।
फेड बनाम गोल्ड की जंग
दिलचस्प बात यह है कि यह खरीदारी उस दौर में हो रही है जब US फेडरल रिजर्व का रुख काफी सख्त है। जैक्सन होल इकोनॉमिक सिंपोजियम में फेड चेयर केविन वॉर्श ने साफ किया है कि महंगाई से लड़ना उनकी पहली प्राथमिकता है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरों के दौर में सोने के मुकाबले सरकारी बॉन्ड्स (Bonds) ज्यादा आकर्षक लगते हैं, लेकिन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स अब यील्ड (Yield) के बजाय रिस्क मैनेजमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सेंट्रल बैंकों का सपोर्ट
सोने की कीमतों को संभालने में सेंट्रल बैंकों का भी बड़ा हाथ है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्लोबल सेंट्रल बैंकों ने दूसरी तिमाही में अब तक की सबसे ज्यादा 289 टन सोने की खरीदारी की है। यह सरकारी मांग बाजार के लिए एक मजबूत सपोर्ट का काम कर रही है, जो कीमतों में ज्यादा गिरावट नहीं आने दे रही।
आने वाले समय में निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि फेड की अगली मौद्रिक नीति और सोने की इस मांग के बीच का संतुलन कैसे रहता है। यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है, तो सोने की मांग एक बड़े बफर (Buffer) का काम कर सकती है।
