भू-राजनीतिक झटके से शेयर बाजार कांपी
आज 4 मार्च, 2026 को, Middle East में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट में घबराहट फैला दी, जिसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी साफ दिखा। Nifty 50 की शुरुआत 2% से ज्यादा की गिरावट के साथ 24,367.05 पर हुई, वहीं BSE Sensex 1,649.34 अंक लुढ़ककर 78,589.51 पर आ गया। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष था, जिसने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई रूट्स पर चिंताएं बढ़ा दीं। Brent क्रूड ऑयल की कीमतें करीब $82.57 प्रति बैरल पर पहुंच गईं। विश्लेषकों का कहना है कि Strait of Hormuz, जो दुनिया के करीब 20% ऑयल और LNG सप्लाई का रास्ता है, पर मंडरा रहे खतरे और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण कीमतें और बढ़ सकती हैं। कतर की LNG प्रोडक्शन रुकने से भी एनर्जी इंपोर्ट करने वाले देशों जैसे भारत पर दबाव बढ़ा है।
सेक्टर्स पर असर और कंपनियों का हाल
इस बड़ी गिरावट के बीच, कई सेक्टर्स पर अलग-अलग असर देखा गया। Middle East में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली Larsen & Toubro (L&T) के शेयर 7.18% गिरकर ₹3,774.80 पर आ गए, जिसका P/E 31.95 है। Tata Steel और Tata Motors जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट रही। दूसरी ओर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण Coal India के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया, इसका P/E 9.07 है। Infosys जैसे IT स्टॉक्स को कमजोर होते रुपये का फायदा मिला, Infosys का P/E 18.66 है। Petronet LNG के शेयर कतर की प्रोडक्शन रुकने की खबरों से करीब 10% लुढ़क गए। कंपनी की मार्केट कैप करीब ₹46,373 करोड़ है और इसका P/E 11.2 है।
रुपये की चाल: दोधारी तलवार
भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले अपनी सबसे बड़ी एक-दिनी गिरावट में से एक का गवाह बना, यह 92 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। जहां एक कमजोर रुपया एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स, खासकर IT कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है (जैसे Infosys), वहीं यह इंपोर्टेड महंगाई को बढ़ा सकता है और देश के करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव डाल सकता है।
स्मॉल और मिडकैप में भारी बिकवाली
छोटे और मझोले शेयरों (small and midcap segments) में तो गिरावट और भी ज्यादा गंभीर रही। ये सेगमेंट वैसे भी ज्यादा वोलेटाइल होते हैं और जोखिम बढ़ने पर इनमें बिकवाली का दबाव सबसे पहले और ज्यादा देखने को मिलता है।
ऐतिहासिक संकेत और निवेशकों की हिदायत
एक्सपर्ट्स निवेशकों को धैर्य रखने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि इतिहास गवाह है कि जब भी भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में उछाल आया है, तब भारतीय बाजारों में गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, 2022 की शुरुआत में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण Nifty करीब 10% तक गिर गया था। अभी Nifty के लिए 24,300-24,350 का स्तर अहम सपोर्ट का काम कर सकता है, जो पिछले साल अगस्त में भी था। इस स्तर के टूटने पर यह 24,100 और 23,800 तक गिर सकता है।
जोखिमों का विश्लेषण
बाजार में आंशिक रिकवरी के बावजूद, कुछ जोखिम बने हुए हैं। L&T का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 1.3217 है, जो चिंता का विषय हो सकता है। Petronet LNG का बिजनेस मॉडल इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर है और भू-राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील है। कमजोर होता रुपया महंगाई बढ़ा सकता है और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की बिकवाली को और तेज कर सकता है, जिससे मार्केट में और ज्यादा अस्थिरता आ सकती है। Infosys (P/E 18.66) और Bharti Airtel (P/E 35.7) जैसे शेयरों के ऊंचे P/E पर बने रहने पर सवाल उठता है, अगर उनकी अर्निंग ग्रोथ धीमी पड़ती है। छोटे और मझोले शेयरों में लिक्विडिटी का संकट इन पर सबसे पहले आता है।
आगे की राह
आगे चलकर, निवेशक Middle East के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की चाल पर बारीकी से नजर रखेंगे। टेक्निकल एनालिस्ट्स का मानना है कि Nifty के लिए 24,650–24,700 का लेवल अहम रेजिस्टेंस का काम करेगा। अगर यह 24,300-24,350 के सपोर्ट लेवल से नीचे जाता है, तो और गिरावट आ सकती है। फिलहाल, निवेशकों को अनुशासित और लॉन्ग-टर्म नजरिया बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
