तनाव कम होने से सोने को मिला बूस्ट
इस तूफानी तेजी की मुख्य वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के वो संकेत हैं, जिनसे यह उम्मीद जगी है कि अमेरिका जल्द ही ईरान से अपने सैनिक वापस बुला सकता है। इस खबर ने भू-राजनीतिक तनाव को कम किया है, जिससे बुलियन (Bullion) यानी सोना और चांदी की कीमतों को सहारा मिला है। स्पॉट गोल्ड $4,700 प्रति औंस के पार निकल गया, जबकि चांदी $75 के करीब पहुंच गई। भारतीय वायदा बाजार MCX पर भी सोने में बढ़त दिखी।
इतर कारक और ऊंची तेल कीमतें
हालांकि, बाजार में कुछ चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं, ब्रेंट क्रूड $105 प्रति बैरल के करीब और WTI $102 के आसपास है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित व्यवधानों को लेकर सप्लाई की चिंताएं बनी हुई हैं। इन ऊंचे तेल की कीमतों से महंगाई (Inflation) बढ़ने की आशंका है, जिसके चलते फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) से इस साल कोई ब्याज दर कटौती (Rate Cut) की उम्मीद कम है। वहीं, डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) का 99 के स्तर के आसपास फिसलना भी सोने को खरीदारों के लिए सस्ता बना रहा है।
माइनिंग स्टॉक्स और आउटलुक
बाजार के जानकारों की मानें तो इस समय गोल्ड माइनिंग कंपनियों जैसे Barrick Gold और Newmont की वैल्युएशन (Valuation) आकर्षक दिख रही है, खासकर भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं को देखते हुए। हालांकि, मार्च महीने में कच्चे तेल में आई बड़ी उछाल ने ऊर्जा बाजार की अस्थिरता को साफ दिखाया।
जारी जोखिम और भविष्य की राह
इसके बावजूद, कुछ बड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं। अमेरिका का ईरान से निकलना अभी पक्का नहीं है, और ईरान की मांगें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से असुरक्षित बना सकती हैं। लगातार ऊंची बनी रहने वाली तेल की कीमतें महंगाई को और बढ़ा सकती हैं, जिससे मांग में कमी आ सकती है या मंदी (Recession) का दबाव बन सकता है। ये ऊंची ऊर्जा लागतें माइनिंग कंपनियों के ऑपरेटिंग खर्च को भी बढ़ाएंगी। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि सोना $4,800 से $5,000 के स्तर तक जा सकता है, लेकिन इसमें तेज उतार-चढ़ाव की उम्मीद है। मार्च में डॉलर इंडेक्स में 2.3% की बढ़त ने भी सोने पर दबाव बनाया था, जो कि भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म होने पर और बढ़ सकता है।
फेड की पॉलिसी और सोने का बचाव
मार्केट का रुख फिलहाल कीमती धातुओं के लिए सतर्क आशावाद (Cautious Optimism) का है। मार्च का महीना मुश्किल रहा, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक कारक और कमजोर होता डॉलर इसे सपोर्ट कर रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) का अनुमान है कि 2026 में सोने में 5% से 15% तक का उछाल आ सकता है, जो आर्थिक मंदी और रेट कट (Rate Cut) के समय पर निर्भर करेगा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (U.S. Federal Reserve) से अप्रैल की मीटिंग में ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद है। महंगाई के बढ़ते जोखिमों के चलते इस साल दरें कम होने की उम्मीदें धूमिल पड़ रही हैं। यह माहौल, जिसमें लगातार महंगाई और स्थिर दरें हों, आमतौर पर सोने और चांदी को महंगाई से बचाव (Inflation Hedge) के तौर पर फायदा पहुंचाता है। हालांकि, अल्पावधि में कीमतों की चाल मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनावों के समाधान पर निर्भर करेगी।