क्यों आई कीमती धातुओं में यह रिकॉर्ड तेजी?
अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढ़ते तनाव, खास तौर पर ईरान पर संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की अटकलों और रूस-यूक्रेन शांति वार्ता में रुकावट जैसी खबरों ने दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। ऐसे में निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली कमोडिटीज (Commodities) की ओर रुख कर रहे हैं। इसी डिमांड के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत ₹18,000 उछलकर ₹2,64,000 प्रति किलो पर जा पहुंची, जो 7.32% की जोरदार तेजी है। वहीं, सोने के भाव ₹1,950 यानी 1.24% बढ़कर ₹1,58,650 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गए। ग्लोबल मार्केट में भी स्पॉट सिल्वर 1.03% चढ़कर $77.97 प्रति औंस और गोल्ड $4,991.24 प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा था, हालांकि, मौजूदा स्पॉट प्राइस सोने को $5,000 और चांदी को $78 प्रति औंस के आसपास दिखा रहे हैं। यह उछाल ऐतिहासिक रहा है, क्योंकि पिछली कई भू-राजनीतिक संकटों में भी सोने की कीमतों में ऐसी ही तेजी देखी गई है।
आगे क्या हैं मैक्रो-इकोनॉमिक संकेत?
हालांकि, भू-राजनीतिक जोखिम कीमतों को बढ़ा रहे हैं, लेकिन निवेशकों की नजरें अब अमेरिका के अहम मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका के जीडीपी (GDP) आंकड़े और पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) इंफ्लेशन के आंकड़े जारी होने वाले हैं। इन आंकड़ों का अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ब्याज दरों को लेकर नीति पर सीधा असर पड़ेगा, जो सोने-चांदी की कीमतों के लिए बहुत अहम है। यह भी देखा गया है कि सोने-चांदी के दाम अक्सर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले विपरीत दिशा में चलते हैं। ऐसे में, फेड की ओर से रेट कट (Rate Cut) के संकेतों का बेसब्री से इंतजार है, जो कीमती धातुओं की कीमतों को और बढ़ा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही जियो-पॉलिटिकल इवेंट्स सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ाते हैं, लेकिन फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) और ब्याज दरों का रुख ही इन तेजी को थाम सकता है या आगे बढ़ा सकता है।
इक्विटी मार्केट बनाम सेफ हेवन
भू-राजनीतिक उथल-पुथल और संघर्ष के समय में, शेयर बाजार (Equity Markets) जैसी जोखिम भरी संपत्तियां अक्सर गिरावट का सामना करती हैं। इस स्थिति में, सोना और चांदी जैसे कीमती धातु अनिश्चितता के खिलाफ हेजिंग (Hedging) के तौर पर निवेशकों के लिए और भी आकर्षक हो जाते हैं। निवेशक डर के मारे जोखिम भरे निवेशों से पैसा निकालकर सोने-चांदी जैसे सुरक्षित ठिकानों की ओर भागते हैं। पिछले साल जहां AI स्टॉक्स ने खूब कमाल दिखाया था, वहीं सोने ने अपने सुरक्षित निवेश वाले दर्जे (Safe-haven Status) के चलते भारी फायदा उठाया। यह बाजार के प्रदर्शन में एक बड़ा अंतर दिखाता है, जो अलग-अलग निवेशक प्राथमिकताओं से प्रभावित होता है।
निवेशकों के लिए जोखिम भरा रुख
इन तेजी के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में लगातार उछाल बने रहने में कुछ बड़े जोखिम हैं।
- भू-राजनीतिक तनाव में कमी: अगर ईरान-अमेरिका या रूस-यूक्रेन मामले में शांति की कोई खबर आती है, तो कीमती धातुओं में अचानक बिकवाली (Sell-off) आ सकती है, जैसा कि अतीत में भी देखा गया है।
- ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना: अगर इंफ्लेशन (Inflation) उम्मीद से ज्यादा बना रहता है या फेडरल रिजर्व अपनी सख्त पॉलिसी बनाए रखता है, तो ब्याज दरें लंबी अवधि तक ऊंची रह सकती हैं। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत होगा और यील्ड (Yield) देने वाली संपत्तियों का आकर्षण बढ़ेगा, जो सोने-चांदी पर दबाव डाल सकता है।
- कम लिक्विडिटी (Liquidity): लूनर न्यू ईयर (Lunar New Year) की छुट्टियों के चलते ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो सकता है, जिससे कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है।
कुछ एनालिस्ट्स ने यह भी कहा है कि मौजूदा बाजार हालात और लिक्विडिटी की चिंताएं देखते हुए वे सोने के अपने टारगेट प्राइस (Target Price) को कम कर सकते हैं। चांदी में हंट ब्रदर्स (Hunt Brothers) द्वारा हुई पिछली हेरफेर (Manipulation) की घटनाओं से यह भी पता चलता है कि रेगुलेटरी एक्शन (Regulatory Action) या बाजार सुधार के चलते सट्टेबाजी से आई तेजी तेजी से खत्म हो सकती है।
भविष्य का संकेत (Future Outlook)
आने वाले समय में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहने की पूरी संभावना है, क्योंकि बाजार बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के साथ-साथ अहम अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की नीतिगत घोषणाओं का विश्लेषण करेगा। सेंट्रल बैंकों द्वारा की जा रही सोने की खरीदारी और निवेशकों की विविधीकरण (Diversification) की रणनीति सोने की कीमतों को एक मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। हालांकि, आने वाले PCE इंफ्लेशन और GDP रिपोर्टें ब्याज दरों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिसका सीधा असर बुलियन (Bullion) की कीमतों पर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स के अनुमानों में बड़ा अंतर, सोने की कीमतों के लिए $3,575 से लेकर $5,750 प्रति औंस तक की रेंज दिखाता है, जो बाजार में भारी अनिश्चितता को दर्शाता है। वैश्विक अस्थिरता, मॉनेटरी पॉलिसी और करेंसी मूवमेंट का आपसी तालमेल आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय करेगा।