भू-राजनीतिक तनाव का असर
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक संकट के गहराने के चलते सोमवार को कीमती धातुओं, यानी सोना और चांदी में बड़ी उछाल देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, गोल्ड फ्यूचर (Gold Futures) ₹5,497 बढ़कर ₹1,67,601 पर कारोबार कर रहे थे, जो 3.39% की वृद्धि है। वहीं, सिल्वर फ्यूचर (Silver Futures) में और भी तगड़ा उछाल आया, जिसमें ₹9,806 का इजाफा हुआ और यह ₹2,92,450 पर पहुंच गया, जो 3.47% की बढ़त है। यह बाजार की प्रतिक्रिया सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई से बढ़े तनाव का नतीजा है, जिसने वैश्विक जोखिम की भावना को काफी बढ़ा दिया है। ऐसे हालात में निवेशक जोखिम भरे निवेशों से निकलकर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर भागते हैं। चांदी, हालांकि सोने से ज्यादा वोलेटाइल (volatile) होती है, लेकिन अनिश्चितता के दौर में यह भी सोने के साथ ही ऊपर जाती है। बाजार में काफी जोखिम का अंदेशा है, जो दोनों धातुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से साफ दिख रहा है। सोना इस समय ₹1,65,000–₹1,70,000 के दायरे में कंसॉलिडेट (consolidate) कर रहा है, जो हाल ही में ₹1,80,000–₹1,81,000 के ऑल-टाइम हाई (all-time high) से गिरावट के बाद आया है, और महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है।
कच्चे तेल में आग, शेयर बाजार दबाव में
कीमती धातुओं में यह तेजी वैश्विक बाजार में चल रही उथल-पुथल के बीच आई है। कच्चे तेल की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आया है, ब्रेंट क्रूड (Brent crude) 13% तक बढ़कर $82 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $72.50 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह उछाल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आपूर्ति बाधित होने के डर के कारण है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ऊर्जा लागत में यह वृद्धि सीधे तौर पर महंगाई (inflation) की चिंताओं को बढ़ाती है, जिससे सोने जैसी महंगाई से बचाव करने वाली संपत्तियों की मांग और बढ़ जाती है। इसके विपरीत, वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव है। एशियाई बाजारों जैसे निक्केई 225 (Nikkei 225) में गिरावट देखी गई, और वॉल स्ट्रीट (Wall Street) के प्री-मार्केट ट्रेडिंग (pre-market trading) में भी कमजोरी के संकेत मिले। यह स्पष्ट रूप से 'रिस्क-ऑफ' (risk-off) सेंटिमेंट को दर्शाता है, जहां पैसा इक्विटी (equities) से निकलकर ठोस सुरक्षित संपत्तियों और भू-राजनीतिक आपूर्ति झटकों के प्रति संवेदनशील कमोडिटीज (commodities) की ओर जा रहा है। इस संकट के बीच सोना और कच्चे तेल की कीमतों का संबंध काफी मजबूत हुआ है, जिसमें कच्चा तेल भू-राजनीतिक जोखिम का संकेतक बन गया है।
क्या है ऐतिहासिक मिसाल और आगे की रणनीति?
इतिहास गवाह है कि मध्य पूर्व के संघर्षों के कारण अक्सर सोने और चांदी की कीमतों में तेज, हालांकि कभी-कभी अस्थायी, उछाल आता है। 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान, सोने की कीमतों में शुरुआती बढ़त के बाद स्थिरता आई थी। इसी तरह, 2003 और 2020 के संघर्षों ने भी महत्वपूर्ण, लेकिन अंततः रेंज-बाउंड (range-bound) या करेक्शन (correction) वाले मूल्य आंदोलन को ट्रिगर किया था। वर्तमान परिदृश्य, जिसमें सीधे हमले और जवाबी कार्रवाई शामिल है, उच्च जोखिम प्रीमियम का संकेत देता है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि सप्ताहांत पर कूटनीतिक विकास होता है या तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं, तो कीमती धातुओं में 3-6% की शुरुआती तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली (profit-taking) हो सकती है। चांदी के लिए लंबी अवधि का तेजी का नजरिया बरकरार है, लेकिन ₹2,50,000 और ₹2,70,000 के बीच के स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट का काम करेंगे; यदि कीमतें इनसे नीचे गिरती हैं तो दबाव बढ़ सकता है। खुदरा निवेशकों को पैनिक बाइंग (panic buying) से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ऐतिहासिक पैटर्न बताते हैं कि तनाव कम होने पर बाजार तेजी से सुधर सकते हैं, जिससे अल्पावधि में नुकसान हो सकता है।
विश्लेषकों की राय और डिमांड का आधार
आगे चलकर, बाजार के जानकारों को उच्च अस्थिरता (volatility) जारी रहने की उम्मीद है। एलकेपी सिक्योरिटीज (LKP Securities) के जितेन त्रिवेदी का मानना है कि भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण बुलियन (bullion) बाजारों में गैप-अप ओपनिंग (gap-up opening) हो सकती है। एनरिच मनी (Enrich Money) के सीईओ पोनमुडी आर. (Ponmudi R.) बताते हैं कि हालांकि गोल्ड फ्यूचर ₹1,65,000 के ऊपर कंसॉलिडेट कर रहे हैं, लेकिन ₹1,58,000–₹1,62,000 के ऊपर मजबूती बनी रहती है तो मोमेंटम (momentum) वापस आ सकता है। तत्काल भू-राजनीतिक कारणों से परे, संरचनात्मक कारक (structural factors) कीमती धातुओं का समर्थन करना जारी रखते हैं। केंद्रीय बैंकों की मांग एक महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है, क्योंकि संस्थान विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोना जमा कर रहे हैं। चांदी के लिए, मजबूत औद्योगिक मांग, विशेष रूप से सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों से, एक मजबूत अंतर्निहित समर्थन प्रदान करती है। मैक्वेरी (Macquarie) ने 2026 के लिए सोने की औसत कीमत लगभग $4,323 प्रति औंस और चांदी के लिए $62 प्रति औंस का अनुमान लगाया है, जो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारकों से समर्थित तेजी के रुझान को दर्शाता है।
जोखिम और चेतावनी
तत्काल उछाल के बावजूद, महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। सबसे प्रमुख जोखिम तनाव कम होने की संभावना है। किसी भी कूटनीतिक सफलता या मध्य पूर्व संघर्ष के त्वरित समाधान के संकेत वर्तमान में देखी जा रही बढ़त को तुरंत खत्म कर सकते हैं। भू-राजनीतिक उछाल के बाद अक्सर होने वाले मूल्य सुधारों के ऐतिहासिक पैटर्न इस भेद्यता को रेखांकित करते हैं। इसके अलावा, हालांकि सोने ने 2025 में बढ़ती वास्तविक यील्ड (real yields) के मुकाबले मजबूती दिखाई है, मौद्रिक नीति की उम्मीदों में बदलाव, जैसे कि ब्याज दरों में कटौती में देरी या कम कटौती, गैर-उपज वाली संपत्तियों (non-yielding assets) के लिए निवेशकों के उत्साह को कम कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतों के प्रति बाजार की संवेदनशीलता भी एक दोधारी तलवार है; लगातार उच्च तेल की कीमतें मुद्रास्फीति की आशंकाओं और सुरक्षित-हेवन मांग को बढ़ाती हैं, लेकिन आपूर्ति चिंताओं का समाधान इस विशिष्ट तेजी वाले कारक को जल्दी से उलट सकता है। विशेष रूप से चांदी में तेजी से होने वाली मूल्य वृद्धि की सट्टा प्रकृति में तेज उलटफेर के अंतर्निहित जोखिम भी हैं, खासकर यदि डेरिवेटिव बाजारों में तरलता (liquidity) की समस्या हल नहीं होती है। निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए, यह पहचानते हुए कि कीमती धातुएं मुख्य रूप से पोर्टफोलियो को स्थिर करने वाले साधन हैं, न कि गारंटीशुदा अल्पकालिक ट्रेडिंग लाभ के साधन, और वर्तमान मूल्य कार्रवाई काफी हद तक तात्कालिक, संभावित क्षणिक, भू-राजनीतिक भावना से प्रभावित है।