Coal India Share Price: Geojit का बड़ा दांव! ₹506 के टारगेट के साथ 'BUY' रेटिंग, जानें क्यों?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Coal India Share Price: Geojit का बड़ा दांव! ₹506 के टारगेट के साथ 'BUY' रेटिंग, जानें क्यों?
Overview

ब्रोकरेज फर्म Geojit Financial Services ने Coal India Ltd. (CIL) के शेयर पर भरोसा जताया है। उन्होंने स्टॉक को 'BUY' रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस **₹506** तय किया है। यह रेटिंग कंपनी की भविष्य की प्रोडक्शन क्षमता को देखते हुए दी गई है, भले ही हालिया Q3 FY26 में रेवेन्यू में **5.2%** की गिरावट आई हो।

Geojit का कोल इंडिया पर भरोसा

Geojit Financial Services ने Coal India Ltd. (CIL) के शेयर को 'BUY' रेटिंग दी है और ₹506 का टारगेट प्राइस सेट किया है। यह वैल्यूएशन एनालिस्ट्स की भविष्य के 6.3 गुना FY28 एस्टिमेटेड EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई) मल्टीपल पर आधारित है, जो कंपनी की भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदें दिखाता है।

Q3 FY26 में कैसे रहे नतीजे?

Coal India के Q3 FY26 के नतीजे दर्शाते हैं कि कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 5.2% घटकर ₹34,924 करोड़ रह गया। यह गिरावट कोयले की कम ऑफटेक वॉल्यूम और ई-ऑक्शन कीमतों में कमी के कारण आई। हालांकि, फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (FSA) दरों में हुई वृद्धि (₹1,435 से ₹1,505 प्रति टन) ने कुछ हद तक इस गिरावट को संभाला।

EBITDA में 24.2% की गिरावट देखी गई और यह ₹9,331 करोड़ पर आ गया। EBITDA मार्जिन 670 बीपीएस घटकर 26.7% पर आ गए। मार्जिन पर दबाव मुख्य रूप से हालिया वेतन समझौतों के कारण कर्मचारी लाभ खर्चों में 21.8% की वृद्धि और स्ट्रिपिंग एक्टिविटी एडजस्टमेंट में 75.3% की उछाल के कारण था, जो ओवरबर्डन हटाने की बढ़ी हुई लागत को दर्शाता है।

भविष्य की रणनीति और जोखिम

इन लागत दबावों के बावजूद, Coal India FY28-29 तक सालाना 1 अरब टन उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रही है, जो FY25 के 781 मिलियन टन उत्पादन से काफी ज्यादा है। सरकार की नीतियां भी घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा दे रही हैं ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।

हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं, जिनमें मार्जिन पर उच्च कर्मचारी और स्ट्रिपिंग लागत का लगातार प्रभाव शामिल है। कोयला खनन से जुड़े ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) जोखिम भी हैं। वहीं, दुनिया भर में क्लीनर एनर्जी की ओर बढ़ते रुझान से लंबी अवधि में कोयले की मांग पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

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