भारतीय शेयर बाजार आज यानी सोमवार को एक सीमित दायरे में कारोबार की शुरुआत कर सकते हैं। GIFT Nifty फ्यूचर्स में करीब **20** अंकों की मामूली बढ़त का संकेत मिल रहा है, जो बाजार में एक स्थिर या हल्के सकारात्मक रुझान की ओर इशारा कर रहा है।
ग्लोबल संकेतों का मिलाजुला असर
भारतीय शेयर बाजार आज, 6 जुलाई 2026, को एक सतर्क मगर सकारात्मक शुरुआत की ओर बढ़ रहे हैं। NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज पर ट्रेड हो रहे GIFT Nifty फ्यूचर्स में लगभग 20 अंकों की बढ़त देखी जा रही है, जो घरेलू बाजार की दिशा का अहम संकेतक है।
यह रुझान पिछले शुक्रवार को घरेलू बाजार के स्थिर प्रदर्शन के बाद आया है, जब Nifty 50 इंडेक्स 95 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 24,270.85 पर बंद हुआ था। वहीं, BSE Sensex 261.79 अंक चढ़कर 77,763.91 पर बंद हुआ था। निवेशक अब वैश्विक परिदृश्य पर नजरें गड़ाए हुए हैं, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जून की मीटिंग के मिनट्स जारी होने का इंतजार है, जो भविष्य की ब्याज दरों के बारे में अहम जानकारी दे सकते हैं।
कमोडिटी मार्केट में बड़ी हलचल
कमोडिटी बाजार, खासकर कीमती धातुओं में, उल्लेखनीय अस्थिरता देखी जा रही है। COMEX गोल्ड की कीमतों में 1.5% से अधिक की तेज उछाल आई है और यह $4,188 प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा है। घरेलू बाजार में भी इसका असर दिख रहा है, जहां 24-कैरेट सोने का भाव ₹1,47,580 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। इसी तरह, चांदी की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। COMEX पर चांदी 3% से अधिक बढ़कर $63 प्रति ट्रॉय औंस हो गई, जबकि स्थानीय बाजार में यह ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। कीमती धातुओं में यह तेजी अक्सर बाजार की अनिश्चितता के बीच निवेशकों की सतर्कता या हेजिंग गतिविधि को दर्शाती है।
कच्चे तेल में स्थिरता, FIIs की खरीदारी
ऊर्जा बाजार में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी हुई है, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग $71.70 प्रति बैरल के आसपास मंडरा रहे हैं। भारतीय निवेशकों के लिए कच्चे तेल की कीमत एक महत्वपूर्ण संकेतक है, क्योंकि यह सीधे देश के आयात बिल को प्रभावित करती है और महंगाई को बढ़ा सकती है, जिसका असर केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर पड़ सकता है।
संस्थागत भागीदारी के मामले में, पिछले हफ्ते के अंत में रुझान मिला-जुला रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 3 जुलाई को ₹1,355.33 करोड़ के शेयर खरीदे, जो भारतीय इक्विटी में उनकी निरंतर रुचि को दर्शाता है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने उसी अवधि में ₹1,953.89 करोड़ के शेयर बेचकर बिकवाल की भूमिका निभाई। भारतीय रुपये में भी कुछ गिरावट देखी गई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.22 पर बंद हुआ।
बाजार सहभागियों की नजरें अब दिन की शुरुआत पर टिकी हैं, ताकि यह देखा जा सके कि पिछले हफ्ते की गति बनी रहती है या नहीं। खासकर, नैस्डैक-100 सहित वैश्विक स्टॉक फ्यूचर्स अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक रुझान का संकेत दे रहे हैं। इस सप्ताह के लिए मुख्य निगरानी योग्य बातों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मिनट्स, धातु की कीमतों में जारी अस्थिरता और संस्थागत प्रवाह का बदलता रुझान शामिल है।
