कच्चे तेल में आग! G7 ने खोली भंडार की चाबी, कीमतों में तूफानी तेज़ी के पीछे की कहानी

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AuthorSaanvi Reddy | Whalesbook News Team

Overview

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तूफानी उछाल देखा जा रहा है। ईरान-इज़राइल संघर्ष की आशंकाओं और प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा सप्लाई में कटौती के चलते, क्रूड ऑयल की कीमतें **25%** से ज़्यादा चढ़कर **2022 के मध्य** के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ऐसे में, दुनिया के सात प्रमुख औद्योगिक देशों (G7) के वित्त मंत्री कीमतों को काबू करने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) को जारी करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

कीमतों में आग: भू-राजनीति और सप्लाई का खेल

यह भारी उछाल 9 मार्च, 2026 को देखने को मिला, जब ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $115 प्रति बैरल पर जा पहुंचे, जो फरवरी के अंत में करीब $90 प्रति बैरल थे। यह दाम 2022 के मध्य के $120 प्रति बैरल के स्तर के करीब हैं। इस तेज़ी की मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है, खासकर ईरान और इज़राइल के बीच, जिससे शिपिंग मार्गों पर व्यवधान का खतरा है। इसके साथ ही, प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन में कटौती का फैसला बनाए रखा है, जिससे बाजार में सप्लाई की कमी हो गई है।

G7 का कदम: क्या भंडार जारी करना होगा असरदार?

इस स्थिति से निपटने के लिए G7 के तीन देश, जिनमें अमेरिका भी शामिल है, अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) से तेल निकालने का समर्थन कर रहे हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) इस पर करीब से नज़र बनाए हुए है। अतीत में, ऐसी कार्रवाइयों ने कीमतों को अस्थायी रूप से नीचे लाने में मदद की है, लेकिन अगर बाजार में सप्लाई और मांग का मूल असंतुलन बना रहता है या भू-राजनीतिक अस्थिरता लंबी खिंचती है, तो इनका असर सीमित रहता है। अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा स्ट्रेटेजिक रिजर्व है, जिस पर इस मामले में काफी निर्भरता रहेगी।

असली वजह: OPEC+ का दबदबा और युद्ध का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि G7 द्वारा भंडार से तेल जारी करने के फैसले की तुलना में OPEC+ देशों, जैसे सऊदी अरब और रूस, द्वारा उत्पादन में की गई कटौती का प्रभाव कहीं अधिक गहरा है। उन्होंने अपने सप्लाई कट को बनाए रखने का संकल्प लिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई पहले से ही तंग हो गई है। इसके अतिरिक्त, ईरान-इज़राइल के बीच चल रहा संघर्ष हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग लेन के लिए एक स्थायी जोखिम पैदा कर रहा है, जो कच्चे तेल के प्रवाह को बाधित कर सकता है।

महंगाई का डर और बाज़ार का भविष्य

ऊंचे तेल के दाम सीधे तौर पर व्यापक महंगाई को बढ़ाते हैं। यह बढ़ती महंगाई विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंकों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकती है, जिससे वे ब्याज दरों में कटौती करने के अपने इरादे को टाल सकते हैं। इससे वैश्विक आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ता है या OPEC+ अपनी उत्पादन कटौती की नीति जारी रखता है, तो कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। G7 द्वारा भंडार जारी करने की चर्चा अल्पावधि में कीमतों पर कुछ असर डाल सकती है, लेकिन सप्लाई की सख्त निगरानी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण लंबी अवधि में दाम ऊंचे रहने की संभावना है।

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