देश के प्रमुख बंदरगाहों, जैसे कांडला और मुंद्रा, पर खाद (DAP और यूरिया) की शिपमेंट्स को डॉक करने में भारी देरी हो रही है। खरीफ बुवाई के पीक सीजन में आई इस सप्लाई चेन की रुकावट से किसानों को पोषक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि बंदरगाहों पर भीड़, लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव इस समस्या के मुख्य कारण हैं।
Detailed Coverage
पोर्ट पर जाम और लॉजिस्टिक्स की मुश्किलें
जरूरी खादों का समय पर वितरण बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि कई जहाज देश के बड़े बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। यह भीड़ ऐसे नाजुक समय पर आई है जब देश भर के किसान खरीफ बुवाई के कामों में लगे हैं। जुलाई में बारिश शुरू होने के साथ ही डी-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और यूरिया जैसी खादों की मांग तेजी से बढ़ी है, ऐसे में सप्लाई चेन में हो रही देरी चिंता का विषय बन गई है।
कांडला, मुंद्रा, न्हावा शेवा और चेन्नई जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर इस समय भारी बैकलॉग (backlog) चल रहा है। इंडस्ट्री की रिपोर्ट्स बताती हैं कि हजारों टन खाद ले जा रहे जहाज एक हफ्ते से ज्यादा समय से बार्थिंग (berthing) का इंतजार कर रहे हैं। लॉजिस्टिक्स की समस्या रेलवे रेक (railway rake) की कमी और माल को अंदरूनी इलाकों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त ट्रेलरों की अनुपलब्धता से और बढ़ गई है। जब खाद बंदरगाहों से गोदामों और फिर वितरण केंद्रों तक तेजी से नहीं पहुंच पाती, तो यह उस संकरे समय-चक्र को चूक सकती है जब फसलों को पोषक तत्वों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
पश्चिम एशिया के तनाव का सप्लाई पर असर
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता वर्तमान व्यवधान के पीछे एक बड़ा कारक है। यह क्षेत्र भारत के खाद आयात और घरेलू उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल, जैसे अमोनिया और सल्फर का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। हॉरमूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले शिपिंग मार्गों पर तनाव के कारण जहाजों के आगमन में देरी हुई है। इसके अलावा, वसंत ऋतु में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के आयात में पहले आई रुकावटों ने घरेलू संयंत्रों की यूरिया का पर्याप्त स्टॉक बनाने की क्षमता को बाधित कर दिया था। हालांकि सरकार ने अधिक एलएनजी (LNG) हासिल करने के कदम उठाए हैं और यूरिया के लिए नई आयात बोलियां जारी की हैं, डीएपी (DAP) जैसे फॉस्फेटिक खादों के लिए कच्चे माल की वैश्विक कमी एक चुनौती बनी हुई है।
बुवाई और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संकेत
मध्य जुलाई तक, खरीफ बुवाई में सुधार हुआ है और यह सामान्य लक्ष्य का लगभग 60% तक पहुंच गई है। चूंकि डीएपी (DAP) अक्सर बुवाई के समय ही लगाया जाता है, इसलिए इन स्टॉक को बंदरगाहों से आगे ले जाने में किसी भी निरंतर देरी से मौजूदा फसल के लिए पोषक तत्वों के प्रभावी उपयोग को सीमित किया जा सकता है। खाद सेक्टर में निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन बंदरगाहों के बैकलॉग (backlog) को कितनी तेजी से साफ किया जाता है और क्या कंपनियां इन देरी से जुड़ी बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागतों को संभाल पाती हैं। कंपनी के मार्जिन पर अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सप्लाई चेन कितनी जल्दी स्थिर होती है और क्या सरकार किसी भी स्थानीय कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त सहायता प्रदान करती है। आगे बढ़ते हुए, जिन प्रमुख संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए उनमें बंदरगाह बार्थिंग डेटा, रेलवे रेक की उपलब्धता और पश्चिम एशिया से कच्चे माल के आयात पर कोई भी नई जानकारी शामिल है।
