विदेशी निवेशकों की रणनीति बदली? ₹33,336 करोड़ निकले, पर पैसा गया कहाँ?
जनवरी 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाज़ार से ₹33,336 करोड़ की बड़ी रकम निकाली। यह किसी भी एक महीने में अगस्त 2025 के बाद सबसे बड़ा आउटफ्लो (Outflow) था। लेकिन, यह सिर्फ भारतीय बाज़ारों से पूरी तरह बाहर निकलने का मामला नहीं था। असल खेल 'सेक्टर रोटेशन' का था, जहाँ FIIs ने एक सेक्टर से पैसा निकालकर दूसरे में लगाया।
मेटल और कैपिटल गुड्स में बंपर निवेश!
इस बड़ी निकासी के बावजूद, FIIs का ध्यान कुछ खास सेक्टर्स पर बना रहा। मेटल और माइनिंग सेक्टर में तो जैसे पैसों की बरसात हो गई, जहाँ ₹11,526 करोड़ का इनफ्लो (Inflow) देखने को मिला। यह इस सेक्टर के लिए लंबे समय के औसत से कहीं ज़्यादा है। वहीं, कैपिटल गुड्स सेक्टर ने भी अपनी पिछली बिकवाली को पलट दिया और ₹2,761 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया।
डिफेंसिव सेक्टर्स पर गिरी गाज!
इसके बिलकुल विपरीत, FIIs ने उन सेक्टर्स में जमकर बिकवाली की, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। FMCG सेक्टर से ₹7,497 करोड़ निकाले गए। हेल्थकेयर सेक्टर से ₹6,162 करोड़ की बिकवाली हुई, और कंज्यूमर सर्विसेस से भी ₹5,513 करोड़ बाहर चले गए। फाइनेंशियल सर्विसेस, जो बाज़ार के लिए बहुत अहम है, वहाँ से भी ₹8,592 करोड़ की बिकवाली जारी रही।
ग्लोबल डिमांड और रिकवरी की उम्मीद
यह पूरी तस्वीर दर्शाती है कि विदेशी निवेशक अब सिर्फ 'सुरक्षा' नहीं, बल्कि 'साइक्लिकल' यानी आर्थिक रिकवरी वाले अवसरों पर दांव लगा रहे हैं। मेटल और कैपिटल गुड्स में निवेश बढ़ना इस बात का संकेत है कि निवेशक ग्लोबल इंडस्ट्रियल डिमांड और इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) में तेज़ी की उम्मीद कर रहे हैं। कमोडिटी (Commodity) की मांग बढ़ने की उम्मीदों ने मेटल सेक्टर को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है।
मार्केट का प्रदर्शन और ब्रोकरेज की राय
जनवरी 2026 में जहाँ निफ्टी 50 (Nifty 50) में मामूली बढ़त देखी गई, वहीं मेटल्स इंडेक्स (Metals Index) ने बाज़ार से कहीं ज़्यादा अच्छा प्रदर्शन किया। एनालिस्ट्स का मानना है कि मेटल सेक्टर में वैल्यूएशन (Valuation) अभी भी आकर्षक हैं, खासकर जब वैश्विक मांग और सप्लाई (Supply) की स्थिति को देखें। हालांकि, FMCG और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स में वैल्यूएशन काफी ऊंचे बने हुए हैं, जिसने विदेशी निवेशकों को थोड़ी चिंता में डाला है।
आगे क्या? रिस्क और आउटलुक
आगे चलकर यह ट्रेंड जारी रहेगा या नहीं, यह ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। अगर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) और महंगाई (Inflation) कंट्रोल में रहती है, तो मेटल और कैपिटल गुड्स में इनफ्लो जारी रह सकता है। लेकिन, अगर महंगाई बढ़ी या ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी आई, तो FIIs तुरंत अपना रुख बदल सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म्स (Brokerage firms) अभी मेटल और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर 'ओवरवेट' (Overweight) रहने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन डिफेंसिव सेक्टर्स पर 'अंडरवेट' (Underweight) या 'न्यूट्रल' (Neutral) रहने की राय है। आने वाले महीनों में FIIs के फ्लो (Flow) पर नज़र रखनी होगी।