FCI का बड़ा एक्शन: गेहूं की सप्लाई दोगुनी कर दी, कीमतों में दिखेगी नरमी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
FCI का बड़ा एक्शन: गेहूं की सप्लाई दोगुनी कर दी, कीमतों में दिखेगी नरमी

Food Corporation of India (FCI) ने 4 नवंबर को साप्ताहिक गेहूं नीलामी की मात्रा बढ़ाकर **1.99 लाख टन** कर दी है। इस कदम से आटा मिलों और फूड प्रोसेसर्स को राहत मिली है, जिससे कई राज्यों में कीमतों में गिरावट देखी गई है।

FCI ने 4 नवंबर, 2026 को अपनी ई-नीलामी में गेहूं की साप्ताहिक मात्रा को दोगुना कर 1.99 लाख टन कर दिया है। इस फैसले से उन थोक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कई हफ्तों से महंगी बोली लगाने को मजबूर थे। पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में सप्लाई बढ़ने से कीमतों में काफी गिरावट आई है।

अलग-अलग राज्यों में कीमतों का हाल

कीमतों में यह गिरावट पूरे देश में एक समान नहीं रही। जहां ज्यादातर राज्यों में भाव ₹200 प्रति क्विंटल तक गिर गए, वहीं महाराष्ट्र में स्थिति इसके उलट रही। महाराष्ट्र में कीमतें ₹107 प्रति क्विंटल बढ़ गईं। यह अंतर बताता है कि सरकारी सप्लाई बढ़ने के बावजूद लॉजिस्टिक और स्थानीय कारणों से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। नीलामी में गेहूं की उठान (Offtake) 93 प्रतिशत रही, जो पिछले हफ्ते के 98 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ इलाकों में अभी भी मांग और सप्लाई के बीच चुनौती बनी हुई है।

पॉलिसी और खरीद सीमा का असर

सरकार ने नीलामी में निजी व्यापारियों को दूर रखकर सिर्फ आटा मिलों जैसे थोक खरीदारों को शामिल करने की नीति जारी रखी है ताकि अनाज सीधे प्रोसेसर्स तक पहुंचे। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि मिलों के लिए तय 'इंडिविजुअल परचेज कैप' (खरीद सीमा) के कारण कीमतों में उम्मीद के मुताबिक बड़ी गिरावट नहीं आ पा रही है। अगर ये सीमाएं बनी रहती हैं, तो बड़े पैमाने के मिलर्स के लिए सप्लाई पाना मुश्किल हो सकता है।

FMCG सेक्टर पर नज़र

फूड प्रोसेसिंग और FMCG सेक्टर की कंपनियों में निवेश करने वालों के लिए ये साप्ताहिक नीलामियां कच्चे माल की लागत (Raw Material Cost) को समझने का सबसे बड़ा इंडिकेटर हैं। गेहूं की ऊंची कीमतें आटा, मैदा और बेकरी प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डालती हैं। निवेशकों को अब इस बात पर गौर करना होगा कि क्या FCI आने वाले हफ्तों में भी यह सप्लाई बरकरार रखेगी और क्या सरकार खरीद की लिमिट में कोई बदलाव करेगी, क्योंकि यही फैक्टर्स इन कंपनियों के इनपुट कॉस्ट को तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.