European Carbon Prices: कार्बन के दाम €100 के पार, भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बढ़ा रिस्क

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AuthorNeha Patil|Published at:
European Carbon Prices: कार्बन के दाम €100 के पार, भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बढ़ा रिस्क

यूरोप में कार्बन अलाउंस की कीमतें इस सर्दी में **€100** प्रति मीट्रिक टन तक पहुँचने की संभावना है। मिडिल ईस्ट में जारी संकट और बढ़ते ऊर्जा संकट के कारण बिजली संयंत्रों को फिर से कोयले का उपयोग करना पड़ रहा है। भारतीय निवेशकों के लिए यह चिंताजनक है क्योंकि स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसे क्षेत्रों पर EU के CBAM (Carbon Border Adjustment Mechanism) के तहत टैक्स का बोझ बढ़ सकता है।

ऊर्जा संकट और कार्बन की कीमतों में उछाल

यूरोप में कार्बन उत्सर्जन परमिट की कीमतें इस सर्दियों में €100 प्रति मीट्रिक टन के स्तर को छूने की राह पर हैं। इस तेजी के पीछे का सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव है, जिसने नेचुरल गैस की कीमतों में आग लगा दी है। गैस महंगी होने के कारण यूरोपीय पावर प्लांट्स को मजबूरन कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। चूँकि कोयला गैस की तुलना में कहीं अधिक उत्सर्जन करता है, इसलिए कंपनियों को EU रेगुलेशन्स के मुताबिक ज्यादा कार्बन परमिट खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे इनकी मांग और दाम दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं।

भारतीय एक्सपोर्टर्स पर क्या होगा असर?

भारत के लिए यह स्थिति सीधे तौर पर चिंता पैदा करती है। यूरोप ने CBAM (Carbon Border Adjustment Mechanism) लागू किया है, जो आयातित सामानों पर एक तरह का 'कार्बन टैक्स' है। इसके दायरे में स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट और फर्टिलाइजर जैसे सेक्टर आते हैं। जैसे-जैसे यूरोप में कार्बन परमिट महंगे होंगे, भारतीय कंपनियों का यूरोप में माल बेचना महंगा हो जाएगा, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव बनना तय है।

इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाएं

यूरोपीय कंपनियां भले ही ईंधन बदलना चाहती हों, लेकिन उनके पास एक बड़ी फिजिकल चुनौती है। पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कई कोयला संयंत्र बंद कर दिए गए थे। अब गैस से कोयले पर स्विच करना इतना आसान नहीं है क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, जो कार्बन परमिट्स की मांग को ऊंचे स्तर पर बनाए हुए है।

आगे की राह

बाजार के जानकारों का मानना है कि यह उछाल अस्थायी है। अनुमान है कि 2027 की दूसरी छमाही तक कार्बन की कीमतें €80 प्रति टन के नीचे आ सकती हैं। यह ग्लोबल एनर्जी मार्केट के स्टेबल होने और नई एनर्जी प्रोजेक्ट्स के शुरू होने पर निर्भर करेगा। फिलहाल, भारतीय निर्यातकों को CBAM नियमों के तहत होने वाले खर्चों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.