पेट्रोल ₹95 पर लीटर! नितिन गडकरी बोले - इथेनॉल की वजह से दाम ₹125 तक नहीं पहुंचे

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AuthorAditya Rao|Published at:
पेट्रोल ₹95 पर लीटर! नितिन गडकरी बोले - इथेनॉल की वजह से दाम ₹125 तक नहीं पहुंचे

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में बताया कि हालिया वैश्विक तनाव के दौरान इथेनॉल की मदद से पेट्रोल की कीमतें ₹125 प्रति लीटर तक जाने से रोकी गईं। कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाकर, इस पहल से बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और आम जनता को राहत मिली है। E20 फ्यूल के इस्तेमाल से भारतीय किसानों की आय में भी ₹1.66 लाख करोड़ का योगदान हुआ है।

इथेनॉल ने कैसे संभाला पेट्रोल का दाम?

सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में अहम साबित हुआ है। पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को बढ़ाकर, भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल का असर खुदरा दामों पर कम करने में सफल रहा है।

बढ़ती कीमतों पर लगाम

हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें 70-80% तक बढ़ीं, वहीं भारत में पेट्रोल की खुदरा कीमतों में सिर्फ 7-8% की मामूली बढ़ोतरी हुई। सरकार ने बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने करीब ₹70 प्रति लीटर की दर से इथेनॉल खरीदा, जिससे दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹94.77 प्रति लीटर पर बनी रही। अगर यह इथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होती, तो ग्राहकों को पेट्रोल के लिए ₹125 प्रति लीटर तक चुकाने पड़ सकते थे।

ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय

EBP प्रोग्राम भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका मकसद कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करना है। देश अपनी कुल खपत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। कीमतों को स्थिर रखने के अलावा, सरकार ने यह भी बताया कि इस पहल से किसानों की आय में ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक का अतिरिक्त योगदान हुआ है, क्योंकि वे इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चा माल मुहैया कराते हैं। इसके साथ ही, आयातित कच्चे तेल की जगह घरेलू इथेनॉल के इस्तेमाल से लगभग ₹1.98 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की भी बचत हुई है।

E20 फ्यूल और गाड़ियों की परफॉर्मेंस

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के गाड़ियों के इंजन पर पड़ने वाले असर को लेकर उठाई गई चिंताओं को दूर किया है। E20 फ्यूल (जिसमें 20% इथेनॉल होता है) का इस्तेमाल ढाई साल से अधिक समय से हो रहा है, और सरकार के अनुसार, इससे किसी बड़ी या व्यापक यांत्रिक समस्या के कोई सबूत नहीं मिले हैं। 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहनों और 3 करोड़ से अधिक यात्री कारों के आंकड़ों से पता चलता है कि आधुनिक इंजन सामान्य मानकों के अनुसार काम कर रहे हैं। इसके अलावा, वाहन निर्माता भी मौजूदा इंजन डिजाइनों की उच्च इथेनॉल मिश्रण के साथ अनुकूलता के प्रति विश्वास दिखाते हुए, मानक वारंटी दायित्वों को बनाए रख रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.