वैश्विक खाद्य कीमतों पर बढ़ता खतरा
आने वाले छह से बारह महीनों में वैश्विक खाद्य कीमतों में एक बड़ी वृद्धि का खतरा मंडरा रहा है। यह बढ़ोतरी बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बिगड़ते जलवायु की स्थिति के मिले-जुले असर के कारण होने की आशंका है। Citi Research की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि कमोडिटी की कीमतें इस साल पहले ही 13% चढ़ चुकी हैं, जो बढ़ती महंगाई का संकेत दे रही हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का जोखिम
होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान वैश्विक खाद्य आपूर्ति के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं। ऐसी किसी भी घटना से ऊर्जा और उर्वरकों की कीमतों में अचानक भारी वृद्धि हो सकती है, जिससे खेती की लागत सीधे तौर पर बढ़ जाएगी। उर्वरकों की उपलब्धता में कमी न केवल फसल की पैदावार को कम करेगी, बल्कि तेल से प्राप्त होने वाले फसल संरक्षण रसायनों को भी प्रभावित करेगी।
अल नीनो का कृषि पर असर
इन भू-राजनीतिक जोखिमों के साथ-साथ अल नीनो (El Nino) के बढ़ते प्रभाव भी चिंता का सबब बने हुए हैं। Citi Research का अनुमान है कि अल नीनो एशिया के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में गर्म मौसम और कम बारिश लाएगा। इस मौसमी पैटर्न से फसल उत्पादन में कमी आने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक खाद्य आपूर्ति और भी कस जाएगी। खासकर चीनी, कोको और कॉफी जैसी फसलें इस खतरे के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील बताई गई हैं।
बायोफ्यूल की मांग का दबाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जीवाश्म ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण कृषि कमोडिटीज का अधिक उपयोग बायोफ्यूल उत्पादन के लिए किया जा सकता है। मांग में यह बदलाव खाद्य कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव को और बढ़ा सकता है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक जटिल चुनौती पैदा हो सकती है।
