दुनिया भर में कॉपर की सप्लाई पर अल नीनो का बड़ा असर पड़ा है। चिली में 2026 के लिए कॉपर उत्पादन के अनुमान को **8.4%** घटाकर **49.4 लाख मीट्रिक टन** कर दिया गया है। Antofagasta जैसी बड़ी कंपनियों ने भी खराब मौसम के चलते अपना प्रोडक्शन टारगेट कम कर दिया है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन में भारी दबाव है।
शक्तिशाली अल नीनो (El Niño) मौसम पैटर्न ने वैश्विक माइनिंग और एनर्जी सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति 2027 की शुरुआत तक बनी रह सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर दक्षिण अमेरिका में देखने को मिल रहा है, जहां खराब मौसम के कारण कंपनियों को उत्पादन कम करना पड़ रहा है। चिली के कॉपर कमीशन, Cochilco ने वर्ष 2026 के लिए उत्पादन अनुमान को घटाकर 49.4 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। यह दुनिया के सबसे बड़े कॉपर उत्पादक देश के लिए सालाना 8.4% की गिरावट है।
माइनिंग कंपनियों पर दबाव
दिग्गज माइनर्स पहले ही ऑपरेशनल दिक्कतों से जूझ रहे हैं। Antofagasta ने अपने 2026 के प्रोडक्शन गाइडेंस को घटाकर 6.25 लाख से 6.55 लाख टन के बीच कर दिया है। कंपनी के मुख्य Los Pelambres साइट पर तूफान के कारण काम ठप हो गया था। इसके अलावा, Codelco और BHP जैसी दिग्गज कंपनियां भी बाढ़ और भारी बर्फबारी के चलते खनन और ट्रांसपोर्टेशन की समस्याओं का सामना कर रही हैं। जाम्बिया और कांगो जैसे देशों में सूखे के कारण जलविद्युत (Hydropower) की कमी से स्मेल्टर्स का काम भी धीमा हो गया है।
एनर्जी सेक्टर में भी हलचल
चीन में कम बारिश के कारण जलविद्युत ऊर्जा की कमी हुई है, जिससे उन्हें थर्मल कोयले और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) पर निर्भर होना पड़ रहा है। इससे उन औद्योगिक सेक्टरों की ऑपरेशनल लागत बढ़ रही है, जो पहले ही लॉजिस्टिक बाधाओं से जूझ रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों के लिए स्थिति जटिल है। हालांकि सप्लाई कम होने से कॉपर की कीमतें बढ़ने की उम्मीद रहती है, लेकिन माइनर्स की लागत भी बढ़ रही है। ऊर्जा की अस्थिरता और इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत का खर्च मुनाफा कम कर सकता है। निवेशकों को अब प्रमुख माइनिंग कंपनियों की नई गाइडेंस और London Metal Exchange के इन्वेंट्री डेटा पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
