मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगड़ रहा है। El Nino का असर खाने-पीने की चीजों की सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है, जिससे खास तौर पर पाम ऑयल और चावल के बाजारों में हलचल की आशंका है। भारत में बफर स्टॉक तो सुरक्षित है, लेकिन इम्पोर्ट पर निर्भर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
सप्लाई चेन में बड़ी चुनौती
2026-2027 में 'El Nino' का असर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे दक्षिण-पूर्वी एशिया और दक्षिणी अफ्रीका के अहम कृषि क्षेत्रों में सूखे का खतरा पैदा हो गया है। इससे चावल, पाम ऑयल, कॉफी और चीनी की ग्लोबल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। भारतीय बाजार के लिहाज से यह स्थिति मिली-जुली है, जहां एक तरफ कुछ सेक्टरों पर लागत का बोझ बढ़ेगा, तो वहीं दूसरी तरफ भारत का मजबूत बफर स्टॉक एक सुरक्षा कवच का काम करेगा।
एडिबल ऑयल कंपनियों पर दबाव
मौसम का सीधा असर एडिबल ऑयल सेक्टर पर दिख सकता है। इंडोनेशिया और मलेशिया, जो भारत के लिए पाम ऑयल के प्रमुख स्रोत हैं, वहां के मुख्य इलाकों में सूखा पड़ रहा है। Adani Wilmar और Patanjali Foods जैसी कंपनियों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि कच्चा माल महंगा होने से इनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है, बशर्ते ये कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर न डाल पाएं।
चावल सेक्टर में राहत की खबर
चावल के मामले में स्थिति थोड़ी बेहतर है। भारत के पास फिलहाल रिकॉर्ड स्टॉक मौजूद है, जो हमें ग्लोबल मार्केट में एक स्टेबलाइजर के रूप में खड़ा करता है। KRBL और LT Foods जैसी कंपनियों के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि बहुत ज्यादा सप्लाई क्रंच की संभावना कम है, जिससे एक्सपोर्ट नियमों में सख्ती होने की गुंजाइश भी कम नजर आ रही है।
महंगाई और RBI की चाल
अगर ग्लोबल स्तर पर खाने-पीने की चीजों की कीमतें लंबे समय तक बढ़ी रहती हैं, तो यह सीधे तौर पर फूड इन्फ्लेशन को बढ़ा देगा। ऐसी स्थिति में Reserve Bank of India (RBI) को महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों (Interest Rates) को ऊंचे स्तर पर बनाए रखना पड़ सकता है। यह FMCG कंपनियों के लिए एक दोहरी मार है, क्योंकि उन्हें एक तरफ बढ़ती इनपुट कॉस्ट और दूसरी तरफ कमजोर कंज्यूमर डिमांड का सामना करना पड़ेगा।
निवेशकों को सलाह है कि वे एडिबल ऑयल कंपनियों के अगले तिमाही नतीजों पर नजर रखें और यह देखें कि वे मार्जिन के दबाव को कैसे हैंडल कर रही हैं।
