इजिप्शियन पाउंड (Egyptian Pound) पिछले कुछ दिनों में डॉलर के मुकाबले करीब **4%** चढ़ गया है, जिससे यह दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी बन गई है। यह उछाल कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद आया है, जिसने महंगाई की चिंताओं को कम किया है और इमर्जिंग मार्केट एसेट्स के लिए निवेशकों के सेंटीमेंट को बेहतर बनाया है।
क्या हुआ?
इजिप्शियन पाउंड की किस्मत मानो पलट गई है। साल की शुरुआत में एनर्जी की बढ़ती कीमतों से भारी दबाव झेलने के बाद, पिछले शुक्रवार से यह करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 4% मजबूत हुई है। इस रिकवरी ने इसे पिछले कुछ दिनों में ग्लोबल मार्केट की सबसे मजबूत करेंसी में से एक बना दिया है। इस तेजी की मुख्य वजह ग्लोबल ऑयल की कीमतों में आई नरमी बताई जा रही है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों से सप्लाई फ्लो के आसान होने की उम्मीदों से बढ़ी है।
ऑयल का कनेक्शन
इजिप्ट जैसे देशों के लिए एनर्जी की कीमतें एक बड़ा फैक्टर हैं, क्योंकि वे भारी मात्रा में फ्यूल इंपोर्ट करते हैं। जब ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं, तो राष्ट्रीय बजट पर दबाव पड़ता है और महंगाई बढ़ती है, जिसका असर करेंसी पर पड़ता है। ऑयल की कीमतों में हालिया गिरावट ने इस ट्रेंड को उलट दिया है। ग्लोबल निवेशकों के लिए, यह एक संकेत है कि इजिप्ट की इकोनॉमी पर पड़ने वाले सबसे बड़े दबावों में से एक कम हो रहा है। मई की शुरुआत से अब तक यह करेंसी 7% से ज़्यादा बढ़ चुकी है, जो बेहतर सेंटीमेंट को दर्शाता है।
निवेशक इसे कैसे देखें?
हालांकि करेंसी में आई ये तेज़ी एक पॉजिटिव संकेत है, लेकिन निवेशक अक्सर सिर्फ रोज़मर्रा के उतार-चढ़ाव से आगे देखते हैं। इजिप्ट के डॉलर-डेनॉमिनेटेड बॉन्ड्स (dollar-denominated bonds) में आई रिकवरी इस बात का संकेत है कि इंटरनेशनल पोर्टफोलियो मैनेजर्स का भरोसा फिर से बढ़ रहा है। जब कोई करेंसी स्टेबल होती है, तो यह लोकल-करेंसी डेट (local-currency debt) को फॉरेन इन्वेस्टर्स के लिए ज़्यादा आकर्षक बना सकती है। हालांकि, यह रिकवरी बाहरी फैक्टर्स, खासकर ऑयल की कीमतों से बहुत ज़्यादा जुड़ी हुई है। अगर जियो-पॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tensions) फिर बढ़ती हैं और ऑयल की कीमतें आसमान छूती हैं, तो करेंसी में आई यह मजबूती खतरे में पड़ सकती है।
IMF प्रोग्राम का संदर्भ
इजिप्ट वर्तमान में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के $8 बिलियन के लोन प्रोग्राम पर काम कर रहा है। इस प्रोग्राम का मकसद रिफॉर्म्स के ज़रिए इकोनॉमी को स्टेबल करना है, जिसमें एक फ्लेक्सिबल एक्सचेंज रेट पॉलिसी (flexible exchange rate policy) भी शामिल है। बाज़ार इस प्रोग्राम के सातवें रिव्यू पर भी कड़ी नज़र रखे हुए है, क्योंकि इसके सफल होने पर लगभग $1.6 बिलियन जारी होने की उम्मीद है। यह फंड फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (foreign exchange reserves) को बनाए रखने और इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण है।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
इमर्जिंग मार्केट पर नज़र रखने वाले निवेशकों को तीन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए। पहला, ग्लोबल ऑयल की कीमतों की स्थिरता, क्योंकि कोई भी अप्रत्याशित उछाल करेंसी को फिर से नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरा, IMF प्रोग्राम की प्रगति, जो इकोनॉमी के लिए एक स्ट्रक्चरल सेफ्टी नेट का काम करता है। तीसरा, व्यापक इमर्जिंग मार्केट सेंटीमेंट, क्योंकि करेंसी में तेज़ी अक्सर तब आती है जब निवेशक डेवलपिंग इकोनॉमी में ज़्यादा रिस्क लेने में सहज महसूस करते हैं। इन फैक्टर्स पर नज़र रखने से यह समझने में मदद मिलेगी कि यह रिकवरी ऑयल प्राइस मूव्स पर एक अस्थायी प्रतिक्रिया है या एक ज़्यादा सस्टेनेबल ट्रेंड की शुरुआत।
