यूरोपीय आयोग (European Commission) ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं के चलते मई 2027 तक भारत को मेटल स्क्रैप के निर्यात पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। साल 2025 में ही भारत ने EU से **3,66,000 टन** से अधिक एल्युमीनियम स्क्रैप आयात किया था, ऐसे में यह नई पॉलिसी भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा सप्लाई रिस्क बन सकती है।
यूरोपीय आयोग ने 21 मई, 2027 से भारत जैसे गैर-OECD देशों को मेटल स्क्रैप भेजने पर पाबंदी लगाने का ड्राफ्ट रेगुलेशन पेश किया है। हालांकि पेपर और टेक्सटाइल जैसे वेस्ट स्ट्रीम्स पर व्यापार जारी रहेगा, लेकिन मेटल वेस्ट को इससे बाहर रखा गया है। EU का कहना है कि भारत में लेड, मरकरी और कैडमियम जैसी धातुओं के प्रोसेसिंग स्टैंडर्ड उनके पर्यावरण मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
रिसाइकलर्स के सामने सप्लाई चेन की चुनौती
यह कदम भारत की सेकेंडरी मेटल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा खतरा है। बड़ी भारतीय कंपनियां और रिसाइकलर्स अपनी जरूरतों के लिए यूरोपीय आयात पर निर्भर हैं। अगर यह प्रतिबंध लागू होता है, तो Gravita India और Pondy Oxides & Chemicals जैसी कंपनियों को या तो नए इंटरनेशनल सप्लायर तलाशने होंगे या फिर घरेलू स्तर पर सोर्सिंग नेटवर्क को तेजी से मजबूत करना होगा।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता लागत (Cost) को लेकर है। यदि यूरोप से सप्लाई बंद होती है, तो इन कंपनियों को अन्य क्षेत्रों से स्क्रैप मंगवाने में अधिक लॉजिस्टिक्स खर्च करना पड़ सकता है, या फिर घरेलू बाजार में स्क्रैप की कीमतें बढ़ने से इनके मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
क्या है रेगुलेटरी टाइमलाइन?
यह प्रस्ताव अभी एक ड्राफ्ट है और कानून नहीं बना है। यूरोपीय आयोग ने अक्टूबर 2026 तक पब्लिक कंसल्टेशन शुरू किया है, और अधिकृत देशों की अंतिम सूची 21 नवंबर, 2026 को जारी की जाएगी। आयोग हर दो साल में इस सूची की समीक्षा करेगा, जिसका मतलब है कि अगर भारत अपने वेस्ट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल में सुधार करता है, तो भविष्य में यह प्रतिबंध हटाया जा सकता है। वर्तमान में, यह मामला EU-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से अलग है, इसलिए मौजूदा ट्रेड डील से इस पर तुरंत असर पड़ने की संभावना कम है।
