मैक्रो इकोनॉमिक्स पर भारी पड़ा 'सेफ हेवन'
मंगलवार, 3 मार्च, 2026 को कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वजह बनीं - डॉलर का लगातार मजबूत होना और ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) का बढ़ना। चांदी की कीमत करीब $83.70 प्रति औंस तक लुढ़क गई, जो हाल के उछाल से काफी नीचे है। वहीं, सोने का भाव $5,322 के आसपास सपाट रहा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉरमूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर मिली धमकियों के बावजूद, सोने-चांदी की पारंपरिक 'सेफ हेवन' (Safe Haven) मांग फीकी पड़ गई। ऐसा लग रहा है कि निवेशक मैक्रो इकोनॉमिक दबावों और महंगाई (Inflation) की उम्मीदों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जो गैर-ब्याज वाले कीमती धातुओं की जगह डॉलर-आधारित संपत्तियों और तेल जैसी महंगाई से बचाव वाली कमोडिटीज (Commodities) को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सप्लाई फियर्स से कच्चा तेल चमका, सोना-चांदी पिछड़े
जहां एक ओर सोना-चांदी कमजोर पड़े, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तूफानी तेजी आई। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 5% से ज्यादा उछलकर करीब $82.82 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड (WTI Crude) में भी ऐसी ही बढ़त देखी गई और यह $75 प्रति बैरल के पार निकल गया। इस तेजी का सीधा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष और हॉरमूज जलडमरूमध्य जैसे अहम शिपिंग रूट्स पर मंडराता खतरा है, जिससे सप्लाई में रुकावट की आशंका बढ़ गई है।
इसके ठीक विपरीत, सोने-चांदी के लिए कहानी अलग रही। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (U.S. Dollar Index) 99 के निशान के करीब पहुंच गया, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई की उम्मीदों के बीच निवेशक डॉलर को एक सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं। डॉलर की यह मजबूती, 4.10% के करीब पहुंचती 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के साथ मिलकर, सोने-चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों के लिए बड़ी बाधा बन रही है। बाजार का मानना है कि इस वक्त भू-राजनीतिक बचाव से ज्यादा अहम महंगाई और करेंसी की मजबूती है।
भू-राजनीतिक जोखिम बनाम मैक्रो चुनौतियां
मिडिल ईस्ट में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है, ईरान पर संभावित हमलों और हॉरमूज जलडमरूमध्य में शिपिंग को लेकर खतरों की खबरें आ रही हैं। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो रही हैं। कई शिपिंग कंपनियों ने वॉर रिस्क सरचार्ज (War Risk Surcharge) बढ़ा दिए हैं, और बीमा कंपनियां इस रूट पर कवरेज रद्द कर रही हैं। इस स्थिति ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाया है और कतर को LNG प्रोडक्शन रोकने पर मजबूर किया है, जो सप्लाई-साइड के जोखिमों को उजागर करता है।
लेकिन, इन बढ़े हुए जोखिमों के बावजूद सोने-चांदी में वैसी रैली नहीं देखी गई, जैसी आम तौर पर देखी जाती है। इसके बजाय, बाजार की नजरें फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की पॉलिसी पर टिकी हैं। अब रेट कट (Rate Cut) की उम्मीदें सितंबर तक टल गई हैं, और 2026 में केवल दो 25-आधार-बिंदु की कटौती की उम्मीद है। वहीं, ISM प्राइस पेड सब-इंडेक्स (ISM Prices Paid Sub-Index) का 3.5 साल के उच्च स्तर पर पहुंचना, महंगाई के बढ़ते संकेतों को और मजबूत करता है, जिससे मैक्रो इकोनॉमिक स्थिरता और करेंसी की मजबूती पर ध्यान केंद्रित हो रहा है।
डॉलर की ताकत और यील्ड्स ने 'सेफ हेवन' को पीछे छोड़ा
कीमती धातुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूत पकड़ और बढ़ती ब्याज दरें बनी हुई हैं। ऐतिहासिक रूप से, मजबूत डॉलर सोने-चांदी की मांग को कम करता है, क्योंकि निवेशक डॉलर-आधारित संपत्तियों को अधिक आकर्षक पाते हैं। यह स्थिति अभी साफ दिख रही है, जिसने भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बावजूद इनकी कीमतों को नीचे धकेला है।
इसके अलावा, ऐसा लगता है कि बाजार ने भू-राजनीतिक जोखिम का काफी हिस्सा पहले ही शामिल कर लिया है, और अब ध्यान फेड की राह और महंगाई पर लौट आया है। हैरानी की बात यह है कि प्लैटिनम (Platinum) और पैलेडियम (Palladium) जैसी अन्य कीमती धातुओं में भी गिरावट आई - प्लैटिनम 6% से ज्यादा टूटा, और पैलेडियम भी हल्का गिरा। यह दर्शाता है कि यह गिरावट किसी विशेष धातु की सप्लाई समस्या के बजाय व्यापक मैक्रो कारकों से प्रेरित है।
आगे का रास्ता: महंगाई और फेड पॉलिसी तय करेगी दिशा
भविष्य में, लगातार बने रहने वाले भू-राजनीतिक जोखिम, महंगाई की ऊंची उम्मीदें और फेडरल रिजर्व की पॉलिसी कीमती धातुओं के रुख को तय करेंगी। हालांकि विश्लेषक उम्मीद कर रहे हैं कि तिमाही के अंत तक चांदी $97.52 और सोना $5,441.74 तक वापस आ सकते हैं, लेकिन ये अनुमान मैक्रो इकोनॉमिक हवाओं के बदलने पर निर्भर करेंगे।
फिलहाल, मौजूदा माहौल यह संकेत दे रहा है कि अमेरिकी डॉलर और बढ़ती यील्ड्स सोना-चांदी के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश करना जारी रखेंगे, और अल्पावधि से मध्यावधि में इनकी 'सेफ हेवन' मांग को दबा सकते हैं। बाजार का तात्कालिक ध्यान महंगाई नियंत्रण और ब्याज दर के अंतर पर है, ऐसे में कीमती धातुएं तब तक दूसरे दर्जे की खिलाड़ी बनी रहेंगी जब तक कि भू-राजनीतिक स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक गहरा झटका न दे दे।