इस साल डिजिटल गोल्ड की बिक्री ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं! 2026 के पहले 6 महीनों में ही **₹17,631 करोड़** का डिजिटल गोल्ड बिक चुका है, जो 2025 के पूरे साल की बिक्री से भी ज्यादा है। UPI पेमेंट की ताबड़तोड़ ग्रोथ इस तेजी का मुख्य कारण बनी है।
UPI का जादू, रिटेल निवेशकों की चांदी
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, डिजिटल गोल्ड की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है। इस साल की पहली छमाही में ₹17,631 करोड़ का आंकड़ा पार हो गया है, जबकि 2025 के पूरे साल में ₹14,549 करोड़ का ही डिजिटल गोल्ड बिका था। इस ग्रोथ का सबसे बड़ा श्रेय UPI को जाता है, जिसके जरिए 90% से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए। औसतन ₹110 के छोटे निवेश से यह डिजिटल गोल्ड उन नए निवेशकों को भी आकर्षित कर रहा है जिनके पास डीमैट अकाउंट नहीं है। PhonePe, Paytm, Amazon Pay जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म और Tanishq जैसे रिटेलर्स अब मात्र ₹1 से भी गोल्ड में निवेश का मौका दे रहे हैं।
गोल्ड ETF की सुस्ती, डिजिटल गोल्ड की रफ्तार
डिजिटल गोल्ड की यह तेजी तब है जब गोल्ड ईटीएफ (Exchange Traded Funds) की बिक्री में नरमी देखी जा रही है। जनवरी में ₹24,000 करोड़ के मासिक रिकॉर्ड के बाद, अगले 5 महीनों में ईटीएफ की कुल बिक्री सिर्फ ₹13,000 करोड़ रही। डिजिटल गोल्ड के उलट, गोल्ड ईटीएफ SEBI द्वारा रेगुलेटेड होते हैं और स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड करते हैं। यह अंतर बताता है कि फिलहाल रिटेल निवेशक डीमैट अकाउंट खोलने और मैनेज करने की झंझट से बचकर, पेमेंट ऐप के जरिए सीधा गोल्ड खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
रेगुलेटरी चिंताएं और इंडस्ट्री का कदम
यह जानना जरूरी है कि डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ की तरह SEBI के दायरे में नहीं आता। अक्टूबर 2025 में SEBI ने इसके अनरेगुलेटेड नेचर पर चिंता जताई थी। इस खबर से बाजार में थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन बिक्री फिर संभल गई। निवेशकों का भरोसा बनाए रखने और पारदर्शिता लाने के लिए, प्रमुख कंपनियों ने मिलकर 'डिजिटल प्रेशियस मेटल्स एश्योरेंस काउंसिल ऑफ इंडिया' (DPMACI) बनाई है। यह बॉडी सेल्फ-रेगुलेशन के जरिए इंडस्ट्री के लिए मानक तय करेगी।
लागत और जोखिम को समझना जरूरी
डिजिटल गोल्ड में निवेश से पहले, इसकी लागत संरचना को समझना अहम है। गोल्ड टोकनाइजेशन के लिए ग्राहकों को GST, स्टोरेज चार्ज और प्लेटफॉर्म की फीस चुकानी पड़ती है। ये अतिरिक्त खर्चे फिजिकल गोल्ड या रेगुलेटेड ईटीएफ की तुलना में आपके रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं। आगे चलकर यह देखना होगा कि DPMACI के नियम पारदर्शिता कैसे बढ़ाते हैं और क्या सरकार भविष्य में डिजिटल गोल्ड के लिए कोई नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाती है।
