वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) और बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल गोल्ड मार्केट आने वाले 7 सालों में **$170 बिलियन** तक पहुंचने का अनुमान है। भारत में अभी **12 करोड़** से ज्यादा लोग डिजिटल गोल्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं।
डिजिटल गोल्ड का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। अभी यह बाजार $45 बिलियन से $55 बिलियन के बीच है, जिसे $170 बिलियन तक पहुंचाने में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और बैंकिंग एप्स की बड़ी भूमिका होगी। छोटे निवेश के विकल्प मिलने के कारण अब आम आदमी भी आसानी से सोने में निवेश कर पा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां वित्तीय सेवाओं के साथ डिजिटल गोल्ड मिलता है, वहां इसकी स्वीकार्यता 7 गुना ज्यादा देखी गई है।
भरोसे का संकट और रेगुलेशन
हालांकि, इस ग्रोथ के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट 'इन्वेस्टर ट्रस्ट' है। सर्वे में शामिल 80% निवेशकों का मानना है कि प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता उनके लिए सबसे जरूरी है। वहीं, 35% निवेशकों ने साफ कहा है कि अगर मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और उपभोक्ता सुरक्षा नीतियां नहीं आईं, तो निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
सिर्फ निवेश ही नहीं, और भी है उपयोग
डिजिटल गोल्ड अब केवल फिजिकल सोने का विकल्प नहीं रह गया है। इसका इस्तेमाल डिजिटल पेमेंट, लोन के लिए कोलैटरल और आसान रिडेम्पशन के लिए किया जा सकता है। आने वाले समय में यह उन नए निवेशकों के लिए गेम चेंजर होगा, जो फिजिकल गोल्ड खरीदने की झंझट से दूर रहना चाहते थे। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनियां अपनी कस्टोडियल सेफ्टी और ऑडिटिंग के मानकों को कैसे और मजबूत करती हैं।
