इस धनतेरस पर ज्वेलरी मार्केट में **₹66,000 करोड़** का कारोबार होने की उम्मीद है। हालांकि, यह उछाल खरीदारी के वॉल्यूम के कारण नहीं, बल्कि सोने की आसमान छूती कीमतों के चलते है।
वैल्यू और वॉल्यूम का अंतर
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अनुसार, इस धनतेरस पर सेल्स का आंकड़ा ₹66,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। डेटा यह साफ बता रहा है कि ग्राहक पुरानी तुलना में ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें सोना कम मिल रहा है। महंगाई के दबाव के कारण अब लोग भारी ज्वेलरी के बजाय हल्के गहनों और छोटे सिक्कों की तरफ रुख कर रहे हैं।
महंगाई और ग्राहकों का बजट
सोने की कीमतें पिछले साल की तुलना में 7% से 10% तक महंगी हैं। खाने-पीने और अन्य जरूरी खर्चों में बढ़ती महंगाई के कारण मिडिल क्लास का बजट बिगड़ गया है। इसी का नतीजा है कि लोग बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। बजट को संतुलित करने के लिए अब ग्राहक अपने पुराने गहनों को एक्सचेंज करके नए ज्वेलरी ले रहे हैं, ताकि नकदी खर्च कम हो।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
लिस्टेड ज्वेलरी कंपनियों पर नजर रखने वाले निवेशकों को यह समझना होगा कि क्या मुनाफा सिर्फ कीमतों के बढ़ने से आया है या बिजनेस वॉल्यूम भी बढ़ा है। आने वाली तिमाही नतीजों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां मार्जिन कैसे मैनेज कर रही हैं। अगर बिक्री का वॉल्यूम नहीं बढ़ता है, तो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।
