Dhanteras Gold: ज्वैलरी खरीदना निवेश नहीं बल्कि खर्च है? एक्सपर्ट्स की ये सलाह पढ़ें

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AuthorNeha Patil|Published at:
Dhanteras Gold: ज्वैलरी खरीदना निवेश नहीं बल्कि खर्च है? एक्सपर्ट्स की ये सलाह पढ़ें

धनतेरस पर सोने की खरीदारी एक परंपरा है, लेकिन इसे निवेश मानने की गलती न करें। भारी मेकिंग चार्ज के कारण ज्वैलरी के मुकाबले गोल्ड ETFs बेहतर विकल्प हैं। सिस्टम में गोल्ड-लोन का आंकड़ा **8 लाख करोड़ रुपये** के पार जाना बताता है कि लोग सोने को सिर्फ एक इमरजेंसी फंड की तरह रखते हैं।

भारत में धनतेरस के दौरान सोना खरीदना एक सांस्कृतिक रस्म है, जिसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की मानें तो ज्वैलरी को एक निवेश रणनीति के तौर पर देखना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। जब आप हार या चूड़ियाँ खरीदते हैं, तो आप भारी मेकिंग चार्ज, वेस्टेज फीस और टैक्स का भुगतान करते हैं। बेचने के समय ये लागतें अक्सर रिकवर नहीं होतीं, जिससे ज्वैलरी एक 'कंजम्पशन' (उपभोग) बन जाती है, न कि 'वेल्थ क्रिएशन' का जरिया।

गोल्ड एक कोलैटरल रिज़र्व के रूप में

लोगों को लगता है कि सोना उनकी नेट वर्थ बढ़ा रहा है, लेकिन डेटा कुछ और ही कहानी कहता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक बैंकों के पास गिरवी रखा गया गोल्ड लोन 5 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है। अगर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के आंकड़ों को जोड़ें, तो यह राशि 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। लेंडर्स के मार्जिन को जोड़कर देखें तो गिरवी रखे गए सोने की कुल वैल्यू 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। यह साफ दिखाता है कि अधिकांश परिवारों के लिए सोना केवल मुसीबत के समय काम आने वाला एक 'इमरजेंसी लिक्विडिटी बैकअप' है।

फिजिकल ज्वैलरी के बेहतर विकल्प

अगर आप मुद्रास्फीति (inflation) से निपटने के लिए गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको सही तरीका चुनना होगा। रिटेल ज्वैलरी लिक्विडिटी के मामले में कमजोर होती है और उसे संभालना भी जोखिम भरा है। इसके मुकाबले, गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) कहीं ज्यादा किफायती और सुरक्षित हैं। इनमें न तो मेकिंग चार्ज का झंझट होता है और न ही स्टोरेज की चिंता।

रेगुलेटरी और मार्केट कॉन्टेक्स्ट

निवेशकों को बदलते रेगुलेटरी माहौल का भी ध्यान रखना चाहिए। अक्टूबर 2026 के मध्य तक, कई फंड हाउसों ने गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स में फ्रेश इनफ्लो को सीमित कर दिया है। यह कदम त्यौहारों के दौरान गोल्ड इम्पोर्ट और मार्केट वोलैटिलिटी को मैनेज करने के लिए उठाया गया है। इस फेस्टिव सीजन, अपनी भावनाओं को पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की ठंडी गणना से अलग रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.